Relationship Viral Story: इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में सीमा पार की शादियों के कई दिलचस्प किस्से आपने सुने होंगे, लेकिन फ्रांस की सिल्वी यस्मीना की कहानी ‘प्यार के खौफनाक अंजाम’ की वो मिसाल है जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। 54 साल की सिल्वी मूल रूप से फ्रांसीसी नागरिक हैं, जो एक समय ऑस्ट्रेलिया में अपनी आलीशान जिंदगी बसर कर रही थीं।
इसी दौरान उनकी मुलाकात एक पाकिस्तानी शख्स से हुई। प्यार का परवान ऐसा चढ़ा कि सिल्वी ने साल 2014 में अपना सब कुछ छोड़-छाड़कर पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के बारा इलाके में कदम रख दिया। उन्हें जरा भी इल्म नहीं था कि निकाह का यह फैसला उनकी जिंदगी को एक अंतहीन नर्क की तरफ धकेल देगा।
रूढ़िवादिता की आड़ में शारीरिक और मानसिक टॉर्चर
निकाह के कुछ ही महीनों बाद सिल्वी की जिंदगी की असल हकीकत सामने आने लगी। स्थानीय रूढ़िवादी रीति-रिवाजों और मजहबी बंदिशों का हवाला देकर उनके पति और ससुराल वालों ने उनके पर कतरने शुरू कर दिए। उन्हें मिट्टी से बने एक जर्जर, टूटे-फूटे मकान में बंद कर दिया गया।
जुल्म की पराकाष्ठा यह थी कि बीते 12 सालों से इस परिवार के पास न तो कोई मोबाइल फोन था, न इंटरनेट और न ही किसी पड़ोसी से बात करने की इजाजत। इस लंबी कैद के दौरान सिल्वी ने पांच बच्चों को जन्म दिया, लेकिन इन मासूमों को कभी स्कूल जाने की इजाजत नहीं मिली। वे घर की चारदीवारी के सन्नाटे में बिना बुनियादी शिक्षा और सामाजिक जीवन के, लगातार हो रहे शारीरिक और मानसिक अत्याचार को सहते हुए बड़े हुए।
जांबाज बेटे ने पिंजरा तोड़कर पुलिस तक पहुंचाई आवाज
इस दमनकारी कैद का अंत तब हुआ जब सिल्वी के एक बेटे ने अपनी जान पर खेलकर हिम्मत दिखाई। एक दिन मौका पाकर वह पहरेदारों और अपने पिता की नजरों से बच निकला और भागते हुए सीधे स्थानीय पुलिस स्टेशन जा पहुंचा।
जब उस बदहवास लड़के ने पुलिस अधिकारियों को अपनी मां और भाई-बहनों पर हो रहे जुल्म की कहानी सुनाई, तो पुलिस महकमा भी सन्न रह गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया और उस जर्जर मकान पर धावा बोलकर सिल्वी और उनके पांचों बच्चों को नरकीय जीवन से आजाद कराया।
सदमे में परिवार, दूतावास ने संभाली कमान
12 साल तक लगातार मिले टॉर्चर और अंधेरे कमरों की बंदिशों के कारण सिल्वी और उनका पूरा परिवार इस समय गहरे मानसिक सदमे (ट्रॉमा) में है। सभी को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां मनोचिकित्सक और डॉक्टर उनकी काउंसिलिंग कर रहे हैं। मामला एक विदेशी नागरिक से जुड़ा होने के कारण पाकिस्तान में मौजूद फ्रांसीसी दूतावास तुरंत हरकत में आ गया है।
दूतावास के अधिकारी लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और सिल्वी व उनके बच्चों को वापस फ्रांस भेजने की कानूनी कागजी कार्रवाई को तेज कर दिया गया है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी पुलिस ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, बंधक बनाने और घरेलू हिंसा की सख्त धाराओं के तहत सिल्वी के पति और उसके मददगारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: ‘क्रॉस-बॉर्डर’ शादियों पर एक्सपर्ट्स की सलाह
इस घटना के सामने आने के बाद इंटरनेट पर अंतरराष्ट्रीय और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच होने वाली शादियों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि कैसे कोई शख्स प्यार के नाम पर किसी विदेशी महिला को इस तरह बंधक बना सकता है।
कानूनी और सामाजिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि किसी दूसरे देश के नागरिक से सोशल मीडिया या चंद मुलाकातों के दम पर शादी करने और वहां शिफ्ट होने से पहले पार्टनर के पारिवारिक बैकग्राउंड, उसके देश की सामाजिक व्यवस्था और वहां के महिला अधिकारों से जुड़े कानूनों की गहन पड़ताल करना बेहद जरूरी है, ताकि कोई भी महिला दोबारा ऐसी किसी खौफनाक साजिश का शिकार न हो।

