Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र के मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज में हड़ताल, 3 महीने से सैलरी न मिलने पर भड़के 325 कर्मचारी
मीरी-पीरी मेडिकल कॉलेज के 325 कर्मियों ने शुरू की हड़ताल
Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में स्थित मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के गलियारों में अब मरीजों की पर्चियों से ज्यादा कर्मचारियों की नारेबाजी गूंजने वाली है। पिछले तीन महीनों से एक भी पैसे की सैलरी न मिलने से तंग आकर संस्थान के करीब 325 कर्मचारियों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। मैनेजमेंट के ढुलमुल रवैए और खोखले आश्वासनों से नाराज स्टाफ ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इसके लिए बाकायदा ‘मीरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति’ का गठन किया गया है, जिसकी 11 सदस्यीय टीम की अगुआई में आज से अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू किया जा रहा है।
“उधार लेकर चल रहा है घर”: भुखमरी के कगार पर पहुंचे कर्मचारी
आंदोलन की राह पर उतरे कर्मचारी हरप्रीत सिंह ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि लगातार 90 दिनों से मानदेय न मिलने के कारण स्टाफ के सामने अब सीधे तौर पर रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मध्यवर्गीय परिवारों के लिए बच्चों के स्कूल की फीस भरना, मकान का किराया देना और बैंकों की लोन किस्तें चुकाना अब नामुमकिन हो चुका है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कई कर्मचारियों को अपने रिश्तेदारों और दुकानदारों से उधार मांगकर घर का चूल्हा जलाना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे बार-बार मैनेजमेंट के दफ्तर के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल तारीख और कोरे आश्वासन ही थमाए गए।
ओपीडी ठप होने के आसार, लेकिन इमरजेंसी पर नहीं लगेगा ताला
कर्मचारियों के इस बड़े कदम का सीधा असर शाहाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों पर पड़ना तय है। आज से शुरू हो रहे इस धरने के कारण अस्पताल की ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) और आईपीडी (भर्ती मरीज विभाग) सेवाएं बुरी तरह चरमरा सकती हैं। हालांकि, अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे इन कर्मचारियों ने इंसानियत का फर्ज नहीं भुलाया है। संघर्ष समिति ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि अस्पताल आने वाले गंभीर मरीजों की जान को कोई खतरा न हो, इसके लिए इमरजेंसी सेवाएं बिना किसी रुकावट के 24 घंटे जारी रहेंगी और इसके लिए बकायदा स्टाफ की रोटेशन वाइज ड्यूटियां लगाई गई हैं।
SGPC बनाम HSGMC: दो कमेटियों की जंग में पिस रहा है आम स्टाफ
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2022 में जाती हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) को कानूनी मान्यता दी थी। इसके बाद से ही इस आलीशान मेडिकल संस्थान के नियंत्रण को लेकर अमृतसर की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और हरियाणा की कमेटी (HSGMC) के बीच खींचतान शुरू हो गई। मामला अदालत में पहुंचा और सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए यहां चुनाव तक एक एडहॉक कमेटी बिठा दी। इसके बाद बीते 4 सितंबर 2024 को हरियाणा कमेटी ने बकायदा एक मेडिकल बोर्ड का गठन कर संस्थान की व्यवस्थाएं देखनी शुरू कीं।
12 मई के अदालती फैसले के बाद और उलझा सैलरी का पेच
इसी साल करीब दो महीने पहले, यानी 12 मई 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए मीरी-पीरी चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने इस पूरे संस्थान का जिम्मा आधिकारिक तौर पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के हाथों में सौंप दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश के तुरंत बाद तख्तापलट हुआ और हरियाणा कमेटी ने संस्थान का पूरा चार्ज तो संभाल लिया, लेकिन इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन का मामला फाइलों में कहीं दबकर रह गया। नया प्रबंधन और पुरानी व्यवस्था के इस प्रशासनिक फेरबदल के बीच संस्थान को अपने खून-पसीने से सींचने वाला कर्मचारी आज सड़क पर बैठने को मजबूर है।
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