Diljit Dosanjh Faith: रॉकस्टार दिलजीत दोसांझ हर सफर में साथ रखते हैं ‘गुटका साहिब’, जानिए इसका महत्व
चकाचौंध के बीच अपनी जड़ों से जुड़े हैं दिलजीत, बयां किया आध्यात्मिक रिश्ता
Diljit Dosanjh Faith: इंसान कामयाबी के चाहे जितने ऊंचे शिखर पर पहुंच जाए, लेकिन जो अपनी जड़ों और जमीन को याद रखता है, वही असल मायने में बड़ा कहलाता है। ग्लोबल म्यूजिक चार्ट्स पर राज करने वाले और दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाले पंजाबी रॉकस्टार दिलजीत दोसांझ की शख्सियत भी कुछ ऐसी ही है।
विदेशों में कॉन्सर्ट्स और हॉलीवुड-बॉलीवुड की चकाचौंध के बीच रहने वाले दिलजीत ने हाल ही में साझा किया कि वे जब भी घर से बाहर या किसी टूर पर होते हैं, तो उनके पास ‘गुटका साहिब’ जरूर होता है। उनका यह बयान इस बात का प्रमाण है कि शोबिज की भागदौड़ में भी वे अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूती से थामे हुए हैं।
आखिर क्या है ‘गुटका साहिब’? क्यों इसे साथ रखते हैं श्रद्धालु
गैर-सिख समाज या जो लोग सिख परंपराओं से गहराई से वाकिफ नहीं हैं, उनके मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि गुटका साहिब क्या है। दरअसल, गुटका साहिब सिख धर्म की एक बेहद पवित्र और लघु आकार की प्रार्थना पुस्तिका है।
इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि कोई भी श्रद्धालु यात्रा के दौरान या घर से दूर होने पर भी आसानी से अपनी दैनिक प्रार्थना (नितनेम) कर सके। इसमें सिखों के सर्वोच्च और शाश्वत गुरु, ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ समेत अन्य श्रद्धेय सिख ग्रंथों की मुख्य और चुनिंदा वाणियों का संग्रह होता है।
इन पवित्र वाणियों का होता है समावेश, प्रकाशन के आधार पर बदलता है स्वरूप
गुटका साहिब के भीतर आमतौर पर सुबह की जाने वाली प्रार्थनाएं जैसे जपुजी साहिब, जाप साहिब, तव-प्रसाद सवैये और शाम के समय पढ़ी जाने वाली रेहरास साहिब शामिल होती हैं।
इसके अलावा रात को सोने से पहले पढ़ी जाने वाली वाणी ‘कीर्तन सोहिला’ और शांति का मार्ग दिखाने वाली ‘सुखमनी साहिब’ के अंश भी इसमें संकलित होते हैं। अलग-अलग धार्मिक प्रकाशनों के अनुसार इसके आकार और वाणियों के संकलन में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य हर परिस्थिति में ईश्वर के स्मरण को आसान बनाना है।
मर्यादा और अनुशासन का प्रतीक; श्रद्धा से झुकता है सिर
सिख मर्यादा में गुटका साहिब का स्थान बेहद आदरणीय है। भले ही यह आकार में छोटा हो, लेकिन इसके प्रति सम्मान और नियम वही होते हैं जो किसी भी पवित्र धर्मग्रंथ के लिए तय हैं।
श्रद्धालु इसे हमेशा एक बेहद साफ-सुथरे स्थान पर, सुंदर रुमाल में लपेटकर रखते हैं। इसे स्पर्श करने से पहले हाथ-पैर धोना और सिर को ढकना अनिवार्य माना जाता है। सिखों के लिए यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित, संतुलित और विनम्र बनाए रखने का एक ईश्वरीय माध्यम है।
आज के इस आधुनिक दौर में, जहां लगातार यात्राएं और व्यस्त जीवनशैली लोगों को अपनी संस्कृति और अध्यात्म से दूर कर देती है, वहीं दिलजीत दोसांझ जैसे वैश्विक कलाकार का यह रुख युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। यह दिखाता है कि आप दुनिया के किसी भी मुकाम पर पहुंच जाएं, लेकिन आपकी आंतरिक शांति और मानसिक ताकत हमेशा आपकी आस्था और संस्कारों से ही मिलती है।
