Narnaul News: कनीना-महेंद्रगढ़ स्टेट हाईवे पर नहर विभाग की लापरवाही ने ली फॉरेस्ट गार्ड की जान, भड़के लोग
कनीना हाईवे पर अव्यवस्था का तांडव, हेलमेट का निकला कचूमर; सिस्टम ने छीन ली परिवार की खुशियां
Narnaul News: कनीना-महेंद्रगढ़ स्टेट हाईवे नंबर 24 पर सोमवार सुबह करीब सवा दस बजे हुआ एक दर्दनाक हादसा महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक अकर्मण्यता और नहर विभाग की घोर लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। उन्हाणी के पास बनाए जा रहे नहरी पुल के कारण पिछले कई दिनों से यहां यातायात रेंग रहा था।
इसी अव्यवस्था ने सोमवार को पाथेड़ा निवासी और फॉरेस्ट गार्ड हरिओम को असमय ही काल का ग्रास बना दिया। यह हृदयविदारक घटना गुढा-चेलावास की सीमा पर स्थित एचपी पेट्रोल पंप के पास घटी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
हेलमेट भी नहीं बचा पाया जान, मौके पर तोड़ा दम
रोज की तरह हरिओम सोमवार सुबह भी अपनी बाइक पर सवार होकर कर्तव्य की राह पर निकले थे। वे कनीना की तरफ अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे। जैसे ही वह पेट्रोल पंप के पास पहुंचे, सड़क पर गाड़ियों की बेतरतीब कतारों और जाम के कारण संतुलन बनाना मुश्किल हो गया। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को चपेट में ले लिया।
टक्कर इतनी भयानक थी कि ट्रक का भारी-भरकम पहिया हरिओम के सिर के ऊपर से गुजर गया। सिर पर सुरक्षा के लिए पहना गया हेलमेट चकनाचूर हो गया और गंभीर चोट (हेड इंजरी) आने के कारण हरिओम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद भागने की कोशिश कर रहे ट्रक को ग्रामीणों ने दादरी सड़क मार्ग के पास घेराबंदी कर काबू किया, हालांकि मौका पाकर चालक फरार होने में कामयाब रहा।
चार महीने पहले ही बंधा था सेहरा, उजड़ गया संसार
इस हादसे की खबर जैसे ही पाथेड़ा गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। हरिओम की शादी अभी कुछ महीने पहले, फरवरी 2026 में ही हुई थी।
जिस घर में अभी शादी की बधाइयों और खुशियों का माहौल पूरी तरह थमा भी नहीं था, वहां अचानक चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से शव को उप-नागरिक अस्पताल कनीना की मोर्चरी में रखवाया और बमुश्किल हाईवे पर लगे लंबे जाम को खुलवाकर यातायात बहाल कराया।
बिना वैकल्पिक रास्ते के खोदा हाईवे, अधिकारियों पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने नहर विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। व्यस्त स्टेट हाईवे पर निर्माण कार्य शुरू करने के स्थापित नियम कहते हैं कि पहले यातायात को मोड़ने के लिए एक पक्का और सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता (डाइवर्जन) तैयार किया जाना चाहिए। लेकिन यहां सारे नियमों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
बिना किसी तैयारी के सड़क को खोद दिया गया, जिससे कनीना की ओर आने-जाने वाले सभी रास्तों पर हर समय जानलेवा जाम के हालात बने रहते हैं। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि अगर विभाग ने सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने के बजाय सुरक्षा के थोड़े भी पुख्ता इंतजाम किए होते, तो आज एक बेकसूर युवा हमारे बीच जिंदा होता।
अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन और नहर विभाग इस होनहार फॉरेस्ट गार्ड की मौत की जिम्मेदारी लेगा? या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी जांच फाइलों के अंबार में दबा दिया जाएगा और सिस्टम किसी दूसरे बेकसूर की जान जाने का इंतजार करेगा?
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