Satluj Movie Ban: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर क्यों चला सरकार का डंडा? जांच के लिए बनी हाई-लेवल कमिटी
क्या दोबारा स्ट्रीम होगी दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज'?
Satluj Movie Ban: मनोरंजन जगत और राजनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. पंजाबी सिनेमा और बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता व सिंगर दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर मचे बवाल के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर इस फिल्म को अचानक हटा दिया गया था. अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करने और फिल्म के कंटेंट की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) का गठन कर दिया है. यह फिल्म मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है.
तीन साल की कानूनी लड़ाई और ‘पंजाब 95’ से ‘सतलुज’ बनने की पूरी कहानी
दरअसल, इस फिल्म का सफर शुरुआत से ही बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है. पहले इस फिल्म का नाम ‘पंजाब 95’ रखा गया था, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की आपत्तियों के बाद इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ किया गया. सेंसर बोर्ड के साथ करीब तीन साल तक चली लंबी कानूनी खींचतान और कट्स के विवाद के बीच, मेकर्स को जब थियेट्रिकल रिलीज का रास्ता साफ नहीं दिखा, तो उन्होंने बीते 3 जुलाई को इसे चुपचाप ZEE5 पर डिजिटल तरीके से स्ट्रीम कर दिया. बिना सेंसर सर्टिफिकेट के फिल्म के इस तरह लाइव होने से प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई और आनन-फानन में सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए प्लेटफॉर्म को इसे तुरंत हटाने का हुक्म सुना दिया.
आईटी एक्ट की धारा 69A का चला डंडा; जानिए क्या हैं वो नियम जिसके तहत सरकार ने लिया एक्शन
फिल्म को डिजिटल प्लेटफॉर्म से गायब किए जाने के बाद अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. हालांकि, मंत्रालय ने यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 69A और आईटी नियम 2021 के कड़े प्रावधानों के तहत की है.
कानूनी प्रावधान: देश की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा और पब्लिक ऑर्डर (सार्वजनिक व्यवस्था) को बनाए रखने के लिए सरकार के पास किसी भी ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने या हटाने का पूरा अधिकार होता है. आईटी नियम 2021 के भाग 3 के तहत इस शक्ति का दायरा बढ़ाते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को भी इसके दायरे में लाया गया है.
अब आगे क्या? नियम 14 के तहत गठित कमिटी के फैसले पर टिकी फिल्म की किस्मत
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पूरा संवेदनशील मामला अब आईटी नियम 2021 के नियम 14 के तहत गठित इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी (IDC) के सुपुर्द कर दिया गया है. इस विशेष समिति में विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जिनका मुख्य काम विवादित कंटेंट से जुड़ी शिकायतों की बारीकी से जांच करना और उस पर केंद्र सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें भेजना होता है. सिनेमाई जानकारों की मानें तो अब फिल्म ‘सतलुज’ का भविष्य पूरी तरह से इसी कमिटी की रिपोर्ट पर निर्भर करता है. यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि क्या दिलजीत दोसांझ की यह फिल्म दोबारा दर्शकों के सामने आ पाएगी या फिर यह पूरी तरह डिब्बाबंद होकर रह जाएगी.
