July 13, 2026

Kurukshetra Weather: बारिश के बाद बढ़ी उमस और तपिश, धान की फसल पर संकट से किसान परेशान

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Kurukshetra Weather: बारिश के बाद बढ़ी उमस और तपिश, धान की फसल पर संकट से किसान परेशान

धान उत्पादक किसानों पर मौसम की दोहरी मार, कुरुक्षेत्र में सूखे खेत और महंगे डीजल का संकट

Kurukshetra Weather: जिले में कई दिनों हुई बारिश के बाद मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है। बारिश की विदाई होते ही तेज धूप और हवा के थमने से उमस व गर्मी ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही हवा में नमी का स्तर बढऩे से लोग पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। इस बदलते मौसम ने आम लोगों के साथ-साथ किसानों, खासकर धान उत्पादकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सोमवार को जिले में गर्मी और उमस ने लोगों को एक बार फिर बेहाल कर दिया।

सुबह से ही आसमान में हलके बादल छाए रहने कारण लोगों को बारिश की उम्मीद थी लेकिन देर शाम तक बारिश नहीं हुई। बादलों और तेज उमस के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर के समय बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सामान्य दिनों की तुलना में भीड़ कम दिखाई दी और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले।

मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को जिले का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं लगभग 11 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं लेकिन इनसे लोगों को गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल सकी। बारिश थमने के साथ ही तापमान और उमस दोनों में फिर बढ़ोतरी हो गई है।

उमस ने छुड़ाए पसीने, बिजली कटौती से बढ़ी आफत

दिन की शुरुआत से ही तेज धूप निकलने के कारण उमस का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। कूलर और पंखे भी इस चिपचिपी गर्मी में राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। वहीं, इस भीषण उमस के बीच ग्रामीण इलाकों में घोषित-अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की आफत को दोगुना कर दिया है।

किसानों की बढ़ी चिंता – धान की फसल पर मंडराया संकट

इस समय खेतों में धान की रोपाई और बढ़वार का काम जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन बारिश रुकने और उमस बढऩे से किसान बेहद परेशान हैं। धान की फसल को इस समय लगातार पानी की जरूरत होती है। बारिश बंद होने से खेतों का पानी सूखने लगा है। अब किसानों को मजबूरन महंगे डीजल और ट्यूबवेल के सहारे खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ रही है।

कीट और बीमारियों का खतरा: कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक उमस और गर्मी का यह मौसम धान की फसल के लिए बेहद संवेदनशील होता है। इस वातावरण में तना छेदक पत्ती लपेटक और फंगस जैसी बीमारियों व कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है, जो फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते है।

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