Dadi Viral: राजकोट की 72 वर्षीय मंजूबेन की ‘रॉयल एंट्री’, काली कार से उतरीं तो दुनिया बोली- स्वैग हो तो ऐसा!
72 की उम्र, गजब का आत्मविश्वास; नाश्ता बेचने वाली मंजूबेन के स्वैग के आगे फेल हुए बड़े स्टार्स
Dadi Viral: कहते हैं कि सोशल मीडिया कब किसकी किस्मत बदल दे और किसे रातोंरात अर्श पर पहुंचा दे, कोई नहीं जानता। आजकल ऐसा ही कुछ राजकोट की गलियों में नाश्ता बेचने वाली 72 साल की मंजूबेन के साथ हो रहा है।
कल तक जो बुजुर्ग महिला अमूमन रोजमर्रा की जद्दोजहद में व्यस्त दिखती थीं, आज उनके साथ सेल्फी लेने और वीडियो बनाने वालों का तांता लगा हुआ है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उन्हें नया नाम मिला है— ‘वायरल दादी’। मंजूबेन की सादगी और उनके अनोखे स्वैग ने बड़े-बड़े इन्फ्लुएंसर्स को पीछे छोड़ दिया है।
एक लिफ्ट, काली कार और बदल गया जिंदगी का रुख
मंजूबेन के इस तरह अचानक चर्चा में आने की कहानी भी बेहद फिल्मी और दिलचस्प है। दरअसल, एक दिन उन्हें कहीं जाना था। उम्र के इस पड़ाव पर पैदल चलने की असुविधा को देखते हुए उन्होंने रास्ते से गुजर रही एक चमचमाती काली गाड़ी के ड्राइवर से लिफ्ट मांग ली। ड्राइवर ने भी सम्मान देते हुए उन्हें गाड़ी में बिठा लिया। मंजूबेन जब अपनी मंजिल पर पहुंचीं और गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर निकलीं, तो वहां मौजूद किसी शख्स ने उनका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
सफेद बालों वाली एक साधारण बुजुर्ग महिला जिस आत्मविश्वास, बिना किसी हिचक और रौब के साथ उस वीआईपी गाड़ी से उतरीं, वह नजारा कैमरे में कैद होकर इंटरनेट पर तैर गया। बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ जब यह रील पोस्ट हुई, तो लोगों ने उनकी सादगी और कॉन्फिडेंस के मिश्रण को हाथों-हाथ लिया।
‘मैं आज की स्टार नहीं, दो साल से मशहूर हूं’
जब स्थानीय मीडिया और यूट्यूबर्स मंजूबेन की इस अचानक मिली शोहरत को कवर करने उनके पास पहुंचे, तो दादी ने जो जवाब दिया उसने लोगों को और प्रभावित किया।
मंजूबेन ने मुस्कुराते हुए कहा, “लोग सोच रहे हैं कि मैं आज मशहूर हुई हूं, लेकिन असल में पिछले दो साल से लोग मेरे यहां आते हैं और वीडियो बनाते हैं। मैं पहले से ही सोशल मीडिया पर जानी जाती हूं।” हालांकि, वे यह भी मानती हैं कि इस ‘ब्लैक कार’ वाली रील ने उनकी लोकप्रियता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
उम्र को दी मात, जज्बे को सलाम
सोशल मीडिया की इस चकाचौंध के बीच मंजूबेन के पैर आज भी जमीन पर हैं। वे किसी वीआईपी की तरह बर्ताव करने के बजाय रोज सुबह उसी स्कूल के बाहर अपना स्टॉल लगाती हैं और बच्चों को नाश्ता परोसती हैं। इस उम्र में अकेले रहना और मेहनत की कमाई पर जीना उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
अपनी जिंदगी के फलसफे पर बात करते हुए मंजूबेन भावुक लहजे में कहती हैं, “अब उम्र के इस मोड़ पर मुझे किसी चीज का खौफ नहीं है— न गिरने का, न चोट का और न ही मौत का। दुनिया मुझे जो प्यार दे रही है, मेरे लिए वही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी दौलत है।” मंजूबेन की यह कहानी साबित करती है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, अगर आपके पास जीने का जज्बा और आत्मविश्वास हो, तो दुनिया खुद ब खुद आपके कदमों में झुक जाती है।
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