Karnal ACB Trap: करनाल आयकर विभाग में एसीबी का बड़ा एक्शन, 10 हजार की घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया चपरासी
चपरासी तो सिर्फ जरिया था? करनाल आयकर विभाग में रिश्वतखोरी के खेल पर एसीबी की बड़ी तफ्तीश शुरू
Karnal ACB Trap: भ्रष्टाचार के खिलाफ सूबे में जारी मुस्तैदी के बीच करनाल से एक बड़ी खबर सामने आई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) में तैनात एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) को घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है।
आरोपी की पहचान नवीन के रूप में हुई है, जो विभाग में चपरासी के पद पर कार्यरत है। सरकारी दफ्तरों में काम के बदले चढ़ावा मांगने वाले नेटवर्क पर चोट करते हुए एसीबी ने आरोपी को रिश्वत की दूसरी किस्त लेते हुए ऐन मौके पर दबोच लिया।
15 हजार में तय हुआ था सौदा, पहली किस्त पहले ही डकार चुका था आरोपी
जानकारी के मुताबिक, आरोपी नवीन ने एक स्थानीय व्यक्ति का कोई सरकारी काम अटका रखा था और उसे पूरा करने के एवज में कुल 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। मजबूरन शिकायतकर्ता ने सौदा तय कर लिया और आरोपी को 5 हजार रुपये की पहली किस्त पहले ही थमा दी थी।
हालांकि, बाकी बचे 10 हजार रुपये देने से पहले पीड़ित ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे एंटी करप्शन ब्यूरो से कर दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी के आला अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपी को रंगे हाथ दबोचने के लिए एक विशेष ट्रैप (जाल) तैयार किया।
जैसे ही थामे केमिकल लगे नोट, ब्यूरो की टीम ने दबोचा
तय योजना के अनुसार, बुधवार को शिकायतकर्ता केमिकल लगे हुए 10 हजार रुपये लेकर आरोपी नवीन के पास पहुंचा। नवीन को भनक तक नहीं थी कि उसकी हर हरकत पर एसीबी की पैनी नजर है।
जैसे ही नवीन ने शिकायतकर्ता से पैसे पकड़े और नोट अपने हाथ में थामे, पहले से ही आसपास सादे कपड़ों में घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने तुरंत धावा बोल दिया। टीम ने मौके पर ही आरोपी के हाथ धुलवाए, तो केमिकल के असर से पानी का रंग लाल हो गया, जिससे घूस लेने की पुष्टि मौके पर ही हो गई। ब्यूरो की टीम ने बिना वक्त गंवाए आरोपी को हिरासत में ले लिया।
चपरासी तो सिर्फ मोहरा था? बड़े अधिकारियों पर भी गहराया शक
इस सनसनीखेज कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या आयकर विभाग का एक अदना सा चपरासी इतनी बड़ी रकम सिर्फ अपने दम पर वसूल रहा था, या फिर इस खेल के पीछे विभाग के किसी बड़े अधिकारी का हाथ है? अमूमन ऐसे मामलों में निचले स्तर के कर्मचारियों को केवल ‘कलेक्शन एजेंट’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
एसीबी के अधिकारी इस बिंदु को ध्यान में रखकर मामले की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं। आरोपी नवीन से पूछताछ की जा रही है कि आखिर यह पैसा विभाग में ऊपर तक किस-किस के पास जाने वाला था। हालांकि, जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए ब्यूरो की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान साझा नहीं किया गया है।
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