Russian Vlogger Viral: भारत के इन 5 नियमों ने रूसी महिला को डाला हैरत में, वीडियो शेयर कर बयां किए अपने ‘कल्चरल शॉक’
विदेशी मैम का फूटा दर्द, बोलीं— 'रूस में बड़ों का नाम लेना सम्मान है, तो भारत में बदतमीजी क्यों?'
Russian Vlogger Viral: कहते हैं कि भारत को समझना किसी भी विदेशी के लिए एक बेहद अनोखा और कई बार चकित कर देने वाला अनुभव होता है। ऐसा ही कुछ हुआ रूस की रहने वाली और वर्तमान में भारत को अपना घर बना चुकीं डिजिटल क्रिएटर अनास्तासिया शारोवा के साथ।
अनास्तासिया ने सोशल मीडिया पर एक रील पोस्ट कर उन पांच बुनियादी आदतों और नियमों का जिक्र किया है, जो रूस और भारत के बीच जमीन-आसमान का अंतर पैदा करते हैं। उनके इस बेबाक और हल्के-फुल्के अंदाज में बनाए गए वीडियो को इंटरनेट पर लाखों व्यूज मिल चुके हैं।
सड़क के इशारे से लेकर होटल रूम तक, सब कुछ है जुदा
अनास्तासिया ने जो पहला और सबसे मजेदार वाकया साझा किया, वह सड़क पर ड्राइविंग से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि रूस में अगर कोई ड्राइवर सामने से हेडलाइट फ्लैश करता है, तो उसका विनम्र मतलब होता है— “पहले आप निकलिए।” इसके विपरीत, भारत की सड़कों पर डीपर चमकाने का सीधा और आक्रामक संदेश होता है— “रास्ते से हट जाओ, मैं गाड़ी नहीं रोकने वाला।”
इसके बाद उन्होंने भारतीय मेहमाननवाजी के एक अनोखे पहलू पर रोशनी डाली। अनास्तासिया के अनुसार, भारत में यदि आप किसी ऐसे शहर में जा रहे हैं जहां आपके परिचित या दोस्त रहते हैं, और आप उनके घर जाने के बजाय होटल में कमरा बुक कर लेते हैं, तो इसे एक तरह का सामाजिक अपराध मान लिया जाता है। लोग इसे निजी तौर पर दिल से लगा लेते हैं कि आपने उन्हें आतिथ्य का मौका क्यों नहीं दिया।
टेक्स्ट मैसेज पर भारी पड़ती ‘डायरेक्ट कॉल’ और ‘हां’ का सस्पेंस
रूसी व्लॉगर को सबसे ज्यादा परेशानी भारतीय लोगों की तुरंत फोन मिलाने की आदत से हुई। उनका कहना है कि पश्चिमी देशों में लोग पहले मैसेज या ईमेल पर बातचीत पसंद करते हैं, जबकि भारत में चाहे पेशेवर काम हो या व्यक्तिगत, लोग सीधे नंबर डायल कर देते हैं। शुरुआत में यह बात उन्हें काफी खटकती थी।
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय समाज के एक मनोवैज्ञानिक पहलू ‘नो-प्रॉब्लम एटीट्यूड’ पर भी चुटकी ली। अनास्तासिया ने हंसते हुए बताया कि रूस में ‘हां’ का मतलब पक्का वादा होता है, लेकिन भारत में कई बार लोग सिर्फ आपका दिल रखने या शिष्टाचार के नाते ‘हां’ कह देते हैं, जिसका वास्तविक मतलब कई बार ‘ना’ या ‘शायद’ भी हो सकता है।
नाम लेने की परंपरा पर गहरा विरोधाभास, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
संस्कृति के सबसे बड़े अंतर का जिक्र करते हुए अनास्तासिया ने बताया कि रूस में सम्मान प्रकट करने के लिए किसी बड़े व्यक्ति को उसके पहले नाम से पुकारना अनिवार्य है, अन्यथा इसे अशिष्ट माना जाता है। वहीं, भारत में किसी बुजुर्ग, शिक्षक या बॉस का नाम जुबान पर लाना बेहद अपमानजनक समझा जाता है। यहां बातचीत में ‘जी’, ‘सर’ या ‘मैम’ का तड़का लगाना बेहद जरूरी है।
इस वीडियो के वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में नेटिजन्स की बाढ़ आ गई है। बड़ी संख्या में भारतीय यूजर्स ने अनास्तासिया की बातों से सहमति जताते हुए लिखा है कि भारत को पूरी तरह समझने के लिए यहां की संस्कृति में डूबना पड़ता है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि यह विविधता ही भारत की असली खूबसूरती है।
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