Haryana News: हरियाणा में धर्मेंद्र हुड्डा की मुहिम पर बवाल: बाबा पेले और सीमा राठौर ने उठाए नीयत पर सवाल
सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने का खेल! हरियाणवी कलाकारों ने अश्लीलता विरोधी मुहिम को बताया नाटक
Haryana News: हरियाणा की म्यूजिक और स्टेज इंडस्ट्री इस समय एक अभूतपूर्व वैचारिक जंग के मुहाने पर खड़ी है। जाट आरक्षण हिंसा मामले में कानून से भगोड़े चल रहे धर्मेंद्र हुड्डा ने सोशल मीडिया पर अश्लील और डबल मीनिंग कंटेंट के खिलाफ जो बिगुल फूंका था, वह अब पूरी तरह से पलट चुका है।
सोशल मीडिया से शुरू हुई यह बहस अब हरियाणवी कलाकारों की साख और अस्मिता की लड़ाई बन गई है। इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकारों ने इस मुहिम के पीछे छिपे ‘पर्सनल एजेंडे’ और महिलाओं को टारगेट करने की मानसिकता को बेनकाब करना शुरू कर दिया है।
इस पूरे विवाद पर बेबाकी से बोलते हुए प्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकाश चांगिया उर्फ बाबा पेले ने माना कि वह खुद भी लंबे समय से साफ-सुथरा कंटेंट बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जब भी कोई आर्टिस्ट अच्छा वीडियो लेकर आता है तो समाज उसे भाव नहीं देता और व्यूज नहीं आते, लोग खुद ही डबल मीनिंग वीडियो की मांग करते हैं।
बाबा पेले ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि हाल ही में आई फिल्म ‘टॉक्सिक’ के ट्रेलर में खुलेआम बोल्ड सीन दिखाए गए हैं, उसे देखने तो सब जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर समाज सुधारना है तो सबसे बड़ी बुराई आज ओयो (OYO) है, उसे बंद कराने के लिए कोई आगे क्यों नहीं आता?
मासूम शर्मा और सपना चौधरी ने दिलाई पहचान, बॉलीवुड तक गूंजा नाम
आकाश चांगिया ने हरियाणा के गौरव को रेखांकित करते हुए कहा कि आज मासूम शर्मा और सपना चौधरी जैसे कलाकारों की बदौलत ही हरियाणवी संस्कृति की गूंज बॉलीवुड तक पहुंची है। यूपी और मुंबई में भी अश्लील डांस होते हैं, लेकिन वहां कोई अपनी ही इंडस्ट्री को बर्बाद करने नहीं दौड़ता।
उन्होंने एलान किया कि वे अब अपने कंटेंट में बदलाव लाएंगे और पारंपरिक हरियाणवी पहनावे (दामन-कुर्ते) को बढ़ावा देंगे। आकाश ने चुनौती देते हुए कहा कि वह खुद सिनेमाघरों के बाहर खड़े होकर देखेंगे कि ‘टॉक्सिक’ जैसी फिल्में रिलीज होने पर कौन-कौन से संस्कारी लोग टिकट खरीदकर अंदर जाते हैं।
दूसरी तरफ, आकाश चांगिया के दोस्त और पेशे से शिक्षक एक शख्स ने इस पूरी मुहिम की हवा निकालते हुए इसे महज पब्लिसिटी स्टंट करार दिया।
उन्होंने कहा कि यह सब सिर्फ ऑनलाइन सट्टे को चमकाने और रातों-रात सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाकर ‘प्रधान’ बनने की भूख है। उन्होंने सवाल दागा कि अगर इन लोगों को समाज की इतनी ही फिक्र है तो श्रीगंगानगर में मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध या देश के करोड़ों छात्रों से जुड़े नीट (NEET) पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर ये तथाकथित समाज सुधारक वीडियो क्यों नहीं बनाते?
‘गंद केवल महिलाएं नहीं, पुरुष भी फैला रहे हैं’— सीमा राठौर का तीखा पलटवार
इस विवाद में सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरी हैं इंस्टाग्राम पर 1.5 मिलियन फॉलोअर्स रखने वाली कलाकार सीमा राठौर उर्फ आयशा। सीमा ने मुहिम का समर्थन तो किया, लेकिन इसके पीछे की पुरुषवादी मानसिकता पर करारा प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि अश्लीलता का ठीकरा सिर्फ लड़कियों पर फोड़ना गलत है। रागनी कार्यक्रमों में अश्लील डांस देखने के लिए जुटने वाली भीड़ पुरुषों की होती है और उन्हें बुलाने वाली कमेटियां भी पुरुषों की ही होती हैं। अगर वाकई में सुधार करना है तो पुरुषों को ऐसे कार्यक्रमों का बहिष्कार करना चाहिए।
सीमा राठौर ने हरियाणवी सिंगर और अभिनेता मीता बरोदा पर अतीत में काम के बदले समझौते का गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैलाई थी, हालांकि मीता ने तब इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था। सीमा ने मौजूदा विवाद पर कहा कि कम कपड़े पहनने वाली लड़कियों को कोसना बहुत आसान है, लेकिन भिवानी की मनीषा के पिता को इंसाफ दिलाने या हरियाणा में बच्चियों के साथ हो रहे असल अपराधों पर ये लोग चुप क्यों हो जाते हैं? साफ है कि समाज सुधार की आड़ में चल रहा यह ड्रामा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
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