July 18, 2026

Bhiwani News: भिवानी जिला जेल में महिला बंदियों ने सीखा आत्मनिर्भरता का पाठ, तीन महीने का सिलाई कोर्स पूरा

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Bhiwani News: भिवानी जिला जेल में महिला बंदियों ने सीखा आत्मनिर्भरता का पाठ, तीन महीने का सिलाई कोर्स पूरा

आदर्श महिला महाविद्यालय की अनूठी पहल, जेल की सलाखों के पीछे महिलाओं को दिया हुनर का संबल

Bhiwani News: किसी भी इंसान के अतीत को पीछे छोड़कर उसे मुख्यधारा में वापस लाने का सबसे मजबूत रास्ता शिक्षा और हुनर से होकर गुजरता है। इसी सोच के साथ भिवानी के जिला कारागार में महिला बंदियों को स्वावलंबी बनाने की एक अनूठी कोशिश मुकाम तक पहुंची है। आदर्श महिला महाविद्यालय द्वारा जेल में बंद महिला कैदियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार को पूरा हो गया।

इस समापन कार्यक्रम में पहुंचे महाविद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के महासचिव अशोक बुवानीवाला ने समाज की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा काम सिर्फ बंदियों को जेल में रखना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक नए जीवन की शुरुआत करने का भरोसा देना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कौशल विकास ही पुनर्वास की दिशा में सबसे बड़ा हथियार है।

चारदीवारी के बाहर भी महिला सशक्तिकरण की गूंज

समारोह को संबोधित करते हुए अशोक बुवानीवाला ने कहा कि कॉलेज प्रबंधन इसी विजन के साथ काम कर रहा है कि महिला सशक्तिकरण के प्रयास सिर्फ संस्थान के कमरों तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि यहां से सिलाई का हुनर सीखकर निकलने वाली ये महिलाएं समाज में अपनी एक नई और सकारात्मक पहचान बनाएंगी।

” बुवानीवाला ने जेल प्रशासन को आश्वस्त किया कि भविष्य में भी आदर्श महिला महाविद्यालय की ओर से जनहित और पुनर्वास से जुड़े ऐसे कल्याणकारी कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि बंदियों में नकारात्मकता खत्म हो और वे एक नए संकल्प के साथ बाहर आएं।

शिविर के समापन के मौके पर कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली महिला बंदियों को संस्थान की प्राचार्या डॉ. अलका मित्तल ने प्रमाण पत्र वितरित किए। बंदियों का हौसला बढ़ाते हुए डॉ. मित्तल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का असली मतलब ही महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मानसिक रूप से आत्मविश्वासी बनाना है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज जो प्रमाणपत्र इन महिलाओं के हाथों में है, वह सिर्फ एक कोर्स पूरा होने की रसीद नहीं है, बल्कि यह उनकी जिंदगी में आने वाले नए अवसरों और सम्मान का प्रतीक है।

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