Modi Cabinet Decisions: मोदी कैबिनेट का किसानों को बड़ा तोहफा, यूरिया नीति 2026 को दी मंजूरी
मोदी कैबिनेट का किसानों को बड़ा तोहफा
Modi Cabinet Decisions: देश के अन्नदाताओं और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नई उर्वरक नीति ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया- 2026’ (NIPU-2026) को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है।
फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत में कृषि विस्तार के साथ यूरिया की मांग भी हर साल औसतन 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर को पाटने के लिए सरकार ने यह दूरगामी नीति तैयार की है, ताकि विदेशी आयात पर देश की निर्भरता को न्यूनतम किया जा सके।
पिछले दशक की कोशिशें और नए निवेश की जरूरत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2012 की पुरानी निवेश नीति (NIP-2012) के तहत अब तक देश में छह नई यूरिया इकाइयां धरातल पर उतारी जा चुकी हैं। इनमें से चार संयंत्र सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संयुक्त उद्यम कंपनियों (JVC) द्वारा और दो संयंत्र निजी घरानों द्वारा स्थापित किए गए हैं।
इन कोशिशों के तहत पिछले दस वर्षों में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले छह नए यूरिया संयंत्र चालू तो हुए, लेकिन भारतीय खेतों की बढ़ती भूख को देखते हुए यह उत्पादन क्षमता अब भी नाकाफी साबित हो रही है। यही वजह है कि NIPU-2026 के रूप में एक नया ढांचा तैयार किया गया है, जो निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को आकर्षित करेगा।
नई नीति के 3 सबसे बड़े बदलाव, जो बदलेंगे फर्टिलाइजर सेक्टर का गणित
इस नई नीति के तहत सरकार ने तीन ऐसे बुनियादी बदलाव किए हैं, जो उद्योग जगत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। पहला बदलाव यह है कि अब सब्सिडी का हिसाब-किताब लगाने के लिए फिक्स्ड कॉस्ट (स्थायी लागत) और वैरिएबल कॉस्ट (परिवर्तनशील लागत) का मूल्यांकन बिल्कुल अलग-अलग किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
दूसरा, कंपनियों के लिए रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) का दायरा 12 से 16 फीसदी तय कर दिया गया है, जिससे कंपनियों को अपनी पूंजी लगाने पर सुरक्षित और बेहतर रिटर्न की गारंटी मिलेगी। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सुधार यह है कि डॉलर में होने वाली फिक्स्ड लागत को 4 साल बाद भारतीय रुपये में बदल दिया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले मुद्रा विनिमय (करेंसी फ्लक्चुएशन) के जोखिम से भारतीय कंपनियों को सुरक्षा मिलेगी।
परियोजनाओं की लागत घटेगी, किसानों को समय पर मिलेगी खाद
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नीति के आर्थिक फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन तकनीकी और वित्तीय सुधारों की बदौलत देश में स्थापित होने वाले प्रत्येक नए यूरिया संयंत्र पर करीब ₹250 करोड़ रुपये तक की सीधी बचत होने की उम्मीद है।
इससे न केवल नई परियोजनाओं को लगाने का खर्च घटेगा, बल्कि सरकार का सब्सिडी प्रबंधन भी अधिक स्थिर और अनुमानित हो जाएगा। अंततः इस पूरी कवायद का सीधा लाभ देश के करोड़ों किसानों को मिलेगा, क्योंकि घरेलू उत्पादन सुदृढ़ होने से ऐन बुवाई के वक्त बाजारों में खाद की किल्लत और कालाबाजारी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
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