July 2, 2026

Ambala News: खुले बोरवेल ने फिर उजाड़ी गोद, 21 घंटे तक मौत से लड़कर हार गया 4 साल का मासूम

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Ambala News: खुले बोरवेल ने फिर उजाड़ी गोद, 21 घंटे तक मौत से लड़कर हार गया 4 साल का मासूम

अंबाला में बोरवेल में गिरे 4 वर्षीय निरवैर सिंह की मौत, 21 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

Ambala News: अंबाला से आई एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर ने पूरे सूबे को गमगीन कर दिया है। धन्होड़ा गांव में बोरवेल के अंधेरे वीराने में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे 4 साल के मासूम निरवैर सिंह को बचाया नहीं जा सका। बुधवार तड़के करीब 3:30 बजे जब रेस्क्यू टीमों ने उसे भारी मशक्कत के बाद बाहर निकाला, तो उम्मीदें टूट गईं। डॉक्टरों ने जांच के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया। इस समय निरवैर का शव अंबाला शहर के सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा गया है।

खेलते-खेलते निगल गई मौत की सुरंग

यह खौफनाक और दर्दनाक वाकया मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुआ था। घर के पास खेलते-खेलते निरवैर अचानक एक खुले पड़े परित्यक्त बोरवेल में समा गया था। बच्चे के गिरने की खबर मिलते ही सेना, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें तुरंत हरकत में आईं और मोर्चा संभाला। कल सुबह से लेकर आज तड़के तक, यानी करीब 21 घंटे तक चले इस बेहद पेचीदा रेस्क्यू ऑपरेशन में आधुनिक तकनीकों और हैवी मशीनों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन कुदरत और समय को कुछ और ही मंजूर था।

डॉक्टरों का विशेष पैनल करेगा पोस्टमार्टम

अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डॉक्टरों की एक विशेष टीम (पैनल) का गठन किया है। डॉक्टरों का यह पैनल ही मासूम निरवैर के शव का पोस्टमार्टम करेगा। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी कागजी कार्रवाई और पंचनामे की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जैसे ही यह कानूनी औपचारिकता पूरी होगी, डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर देगी, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।

कब थमेगा इन ‘डेथ ट्रैप्स’ का सिलसिला?

इस हादसे के बाद निरवैर के घर में कोहराम मचा हुआ है और मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना ने एक बार फिर हमारी व्यवस्था के उस ढुलमुल रवैए को बेनकाब किया है, जहां नियमों के बावजूद खेतों और रिहायशी इलाकों में बोरवेल खुले छोड़ दिए जाते हैं। सवाल यह उठता है कि इन जानलेवा गड्ढों को खुला छोड़ने वाले जमीन मालिकों और उनकी अनदेखी करने वाले स्थानीय प्रशासन पर सख्त कार्रवाई कब होगी? आखिर कब तक मासूमों की बलि चढ़ने के बाद ही हमारी नींद टूटेगी?

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