Bikaner Breaking News: बीकानेर के PBM अस्पताल में फिर प्रसूता की मौत, अस्पताल ने गंभीर बीमारी बताई वजह, पति के पुलिस पर आरोप
बीकानेर के PBM अस्पताल में फिर प्रसूता की मौत
Bikaner Breaking News: बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद आईसीयू में भर्ती एक और प्रसूता की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल में पिछले एक महीने के भीतर किडनी फेल और मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन से चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। ताजा घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने हंगामा किया और इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए। अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मरीज पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और उसे बचाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह के साथ लगातार इलाज किया गया। बीकानेर में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं और गंभीर मरीजों के इलाज को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इन मामलों में हर मरीज की मेडिकल स्थिति अलग रही है, लेकिन लगातार हो रही मौतों से लोगों में चिंता बढ़ी है।
पति का आरोप- बिना जानकारी दिए ऑपरेशन थिएटर ले गए
मृतका कमला के पति मेघराज ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी करीब एक महीने से आईसीयू में भर्ती थी। लगभग 15 दिन पहले उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था और पांच दिन पहले आईसीयू में ही ट्रेकियोस्टोमी की गई थी। मेघराज के मुताबिक मंगलवार को कमला के गले से काफी खून बह रहा था। दोपहर करीब 12:30 बजे डॉक्टर पैकिंग खोलने की बात कहकर उसे ऑपरेशन थिएटर ले गए। करीब एक घंटे बाद उसे वापस आईसीयू लाया गया और शाम करीब सवा चार बजे मौत की सूचना दे दी गई। उनका कहना है कि डॉक्टरों ने यह नहीं बताया कि ऑपरेशन थिएटर में क्या प्रक्रिया की गई।
मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, शव लेने से किया इनकार
मौत की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल में आक्रोशित हो गए। सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को मॉर्चरी भिजवाया गया। मेघराज का आरोप है कि पुलिस ने शव जबरदस्ती मॉर्चरी भेज दिया और उन्हें अंतिम बार पत्नी का चेहरा तक नहीं देखने दिया। इसी नाराजगी के चलते परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। हालात को देखते हुए मॉर्चरी के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया।
अस्पताल प्रशासन ने बताया मरीज का मेडिकल इतिहास
एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि कमला पहले से टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित थी और समय पर इंसुलिन नहीं लेने की बात भी सामने आई थी। डिलीवरी के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और वह मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन की स्थिति में पहुंच गई। डॉ. सुरेंद्र वर्मा के अनुसार मरीज के इलाज में एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी लगातार सलाह ली गई। इसके बावजूद मंगलवार को कार्डियो रेस्पिरेटरी अरेस्ट आने से उसकी मौत हो गई।
मेडिकल बोर्ड ने इलाज की पूरी प्रक्रिया बताई
मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. श्यामलाल मीणा ने बताया कि 23 जून को मेडिकल बोर्ड गठित होने के बाद मरीज की हालत में कुछ सुधार दर्ज किया गया था। गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अनिता शर्मा ने कहा कि 9 जून को सिजेरियन डिलीवरी के बाद यूरिन आउटपुट बंद होने पर मरीज को आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। डिलीवरी जटिल थी और खून के थक्के बनने के कारण करीब 15 दिन बाद दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र फालोदिया ने बताया कि इलाज के दौरान कमला के 19 डायलिसिस किए गए। उपचार के बाद उसका यूरिन आउटपुट बढ़कर 900 एमएल तक पहुंच गया था।
एक महीने में चार और प्रदेश में 23 प्रसूताओं की मौत
पीबीएम अस्पताल में पिछले एक महीने के दौरान किडनी फेल और मल्टी ऑर्गन डिसफंक्शन से यह चौथी प्रसूता की मौत है। इससे पहले 19 जून को प्रीति, 21 जून को शारदा और 6 जुलाई को लीला देवी की मौत हो चुकी है। अस्पताल में इसी तरह की गंभीर स्थिति में भर्ती सात प्रसूताओं में से तारा, राहिला और इमरती इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुकी हैं।
प्रदेश स्तर पर देखें तो सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद संक्रमण से अब तक 23 प्रसूताओं की मौत दर्ज की जा चुकी है। इससे पहले कोटा, बीकानेर, जोधपुर, बांसवाड़ा और भीलवाड़ा से भी ऐसे मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के बाद ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में संक्रमण की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों को निर्धारित एसओपी का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
