Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ ने फिल्म ‘सतलुज’ के लिए ली सिर्फ 1 रुपये फीस, डायरेक्टर हनी त्रेहान का बड़ा खुलासा
जसवंत सिंह खालड़ा के किरदार के लिए दिलजीत दोसांझ ने नहीं लिए करोड़ रुपये
Diljit Dosanjh: ग्लोबल स्टार बन चुके एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। यह फिल्म अपनी रिलीज के बाद से ही विवादों और चर्चाओं के केंद्र में बनी हुई है। बीते 3 जुलाई को इसे बड़ी उम्मीदों के साथ ओटीटी पर रिलीज किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर अचानक इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद से फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है।
मेकर्स जहां एक तरफ फिल्म को ओटीटी पर दोबारा वापस लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके डायरेक्टर हनी त्रेहान ने दिलजीत दोसांझ की फीस को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है जिसने फैंस का दिल जीत लिया है।
‘जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार बेचने के लिए नहीं है’ – दिलजीत ने ठुकराई मोटी रकम
एक मीडिया संस्थान (The Print) से बातचीत के दौरान डायरेक्टर हनी त्रेहान ने बताया कि जब फिल्म के प्री-प्रोडक्शन के दौरान दिलजीत दोसांझ के साथ कागजी कार्रवाई और फीस तय करने की बात आई, तो एक्टर ने साफ तौर पर कोई भी बड़ी रकम लेने से इनकार कर दिया। दिलजीत का तर्क बेहद भावुक और स्पष्ट था। उनका कहना था कि पंजाब के इतिहास में मानवाधिकारों के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले जसवंत सिंह खालड़ा जैसे महान व्यक्ति के संघर्ष को पर्दे पर जीने के लिए वे व्यावसायिक फीस नहीं ले सकते।
हालांकि, कानूनी तौर पर कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक तय रकम लिखना अनिवार्य था, जिसके बाद दिलजीत के ही कहने पर उनकी फीस के कॉलम में महज 1 रुपये की टोकन राशि दर्ज की गई। दिलजीत ने साफ किया कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए कोई कमर्शियल फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी और सम्मान का विषय है।
मिट्टी से जुड़ाव और किरदार की साख: क्यों दिलजीत ही थे डायरेक्टर की इकलौती पसंद?
डायरेक्टर हनी त्रेहान ने इस बात पर भी रोशनी डाली कि आखिर इस संवेदनशील भूमिका के लिए उन्होंने दिलजीत दोसांझ को ही क्यों चुना। हनी के मुताबिक, इस कहानी के साथ न्याय करने के लिए उन्हें एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो पंजाब की मिट्टी के दर्द, वहां के इतिहास के थपेड़ों और सिख संस्कृति की गहरी समझ रखता हो।
उनका मानना था कि अगर बॉलीवुड या किसी बाहरी इंडस्ट्री के किसी ऐसे कलाकार को लिया जाता जिसका पंजाब के जमीनी हालात से सीधा जुड़ाव नहीं है, तो दर्शक मुख्य कहानी और जसवंत सिंह खालड़ा के असल संघर्ष से भटक सकते थे। हनी त्रेहान ने कहा कि जब वे स्क्रिप्ट लिख रहे थे, तभी से उनके जहन में सिर्फ दिलजीत का चेहरा घूम रहा था और जब उन्होंने दिलजीत से मिलकर कहानी साझा की, तो एक्टर ने बिना एक पल गंवाए इस ऐतिहासिक किरदार के लिए हामी भर दी थी।
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