Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र की 8 साल की बेटी ने मलेशिया में गाड़ा झंडा: एशियाई योगा चैंपियनशिप में जीते दो गोल्ड और दो कांस्य पदकविदेशी धरती पर चमकी नन्ही योग साधक डिविना, 10 देशों के मुकाबले में जीते 4 मेडल

Kurukshetra News: कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, और इस बात को कुरुक्षेत्र की नन्ही बेटी डिविना मनचंदा ने पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिखाया है।

मलेशिया के कुआलालंपुर में 24 से 26 जून तक आयोजित हुई 5वीं एशियाई योगा चैंपियनशिप में 8 वर्षीय डिविना ने अपनी सुगठित योग मुद्राओं से न केवल जजों को हैरान किया, बल्कि दो गोल्ड और दो ब्रॉन्ज (कांस्य) मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। कुरुक्षेत्र के विज्डम वर्ल्ड पब्लिक स्कूल की तीसरी कक्षा की यह छात्रा अब देश के योग क्षेत्र में एक उभरता हुआ चमकता सितारा बन गई है।

10 देशों के मुकाबले में कुरुक्षेत्र की बेटी ने मारी बाजी

इस एशियाई योग प्रतियोगिता की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें एशिया के 10 प्रमुख देशों के शीर्ष योग खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।

पूरे भारत से इस चैंपियनशिप के लिए महज 20 खिलाड़ियों का चयन हुआ था, जिसमें कुरुक्षेत्र और हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने वाली डिविना एकमात्र छात्रा थीं। डिविना के साथ मलेशिया गए उनके दादा एच.वी. मनचंदा ने बताया कि प्रतियोगिता का स्तर बेहद कड़ा था, लेकिन डिविना के हौसले और उनकी एकाग्रता ने उन्हें प्रतियोगिता की ‘सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’ (बेस्ट प्लेयर) के पायदान पर ला खड़ा किया।

विश्व पटल पर भारत का तिरंगा लहराया

यह पहली बार नहीं है जब डिविना ने योग के मंच पर अपनी छाप छोड़ी हो। इससे पहले पिछले साल 13 से 16 नवंबर तक करनाल में आयोजित हुई इंटरनेशनल वर्ल्ड योगा प्रतियोगिता में भी उन्होंने भारत की ओर से खेलते हुए तीसरा स्थान हासिल किया था।

लेकिन इस बार विदेशी धरती पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस बड़ी चैंपियनशिप में उतरकर उन्होंने जिस परिपक्वता के साथ प्रदर्शन किया, उसने सबको चौंका दिया है। डिविना की इस स्वर्णिम सफलता के पीछे उनकी कोच परविंदर कौर का कड़ा परिश्रम और विशेष मार्गदर्शन रहा है, जिन्होंने इस नन्ही सी उम्र में उन्हें अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के लिए तैयार किया।

माता-पिता भावुक, स्कूल में बधाई देने वालों का तांता

बेटी की इस ऐतिहासिक कामयाबी पर कुरुक्षेत्र में उनके निवास स्थान पर जश्न का माहौल है। डिविना के पिता डॉ. भरतवीर मनचंदा और माता डॉ. सलोनी मनचंदा अपनी लाडली की इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे हैं। उनका कहना है कि डिविना की लगन का ही परिणाम है कि आज उसने इतनी छोटी सी उम्र में देश का मान बढ़ाया है।

दूसरी तरफ, स्कूल के प्रांगण और अध्यापकों के बीच भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि डिविना ने कुरुक्षेत्र और पूरे हरियाणा को गौरवान्वित किया है और उनके स्कूल लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।