Haryana Civil Surgeon: हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में अब टूटे हुए पंखे, खराब एसी या पेयजल की किल्लत जैसी बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए फाइलों को चंडीगढ़ भेजने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वास्थ्य व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सिविल सर्जनों (सीएमओ) को वित्तीय रूप से और अधिक आत्मनिर्भर बना दिया है।
मुख्यमंत्री के नए निर्देशों के तहत सिविल सर्जन की वित्तीय शक्ति की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 10 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों के रख-रखाव के लिए लोकनिर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों और स्थानीय एनजीओ को मिलाकर एक विशेष तालमेल कमेटी बनाई जाएगी, जो बिना किसी देरी के कमियों को दुरुस्त करेगी।
सरकारी चौखट पर बढ़ा मरीजों का विश्वास, आयुष्मान के आंकड़ों ने दी गवाही
मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के आधुनिकीकरण की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने एक बेहद दिलचस्प और उत्साहजनक आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का ही नतीजा है कि लोग अब निजी अस्पतालों के बजाय सरकारी डॉक्टरों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
आयुष्मान भारत योजना के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में जहां केवल 8.83 मरीजों ने सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया था (जिसके लिए सरकार ने 26 करोड़ रुपये के बिल चुकाए थे), वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह ग्राफ तेजी से बढ़कर 32 पर पहुंच गया है। इस बार सरकार ने सरकारी अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण और इलाज के एवज में 126 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया है।
छतों पर उतरेंगे सोलर पैनल, जच्चा-बच्चा वार्ड का होगा कायाकल्प
बिजली की भारी डिमांड और ट्रिपिंग की समस्या से निपटने के लिए बैठक में तय किया गया कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की छतों पर सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इन प्लांट्स को ‘नेट मीटरिंग’ तकनीक के जरिए सीधे बिजली ग्रिड से जोड़ा जाएगा, जिससे जरूरत से ज्यादा बनने वाली बिजली ग्रिड में चली जाएगी।
इसके अलावा, अस्पतालों के भीतर के माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए, विशेषकर जच्चा-बच्चा (मैटर्निटी) वार्डों में आकर्षक वॉल पेंटिंग कराई जाएगी और एयरकंडीशनर (AC) की पुख्ता व्यवस्था होगी। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस मानसून सीजन में स्वास्थ्य परिसरों में 17 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 3000 पौधे रोपे जा चुके हैं।
स्तन कैंसर के खिलाफ बड़ी मुहिम, इन 8 शहरों में लगेंगी मैमोग्राफी मशीनें
इस पूरी कवायद में महिलाओं के स्वास्थ्य को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा गया है। साइलेंट किलर माने जाने वाले स्तन कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर) की समय पर पहचान के लिए सरकार ने जिला नागरिक अस्पताल पंचकूला, रेवाड़ी, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, पानीपत, करनाल, नारनौल और गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में आधुनिक मैमोग्राफी मशीनें स्थापित करने का फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चरणबद्ध तरीके से बाकी जिलों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाए और जहां भी जरूरत लगे, वहां पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर अस्पताल की सेवाओं को और बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाशी जाएं।

