Haryana News: हरियाणा सरकार ने पंचायतों को दिए आदेश, काम न करने पर लगेगा जुर्मानागांवों में भी शहरों की तरह घर-घर से उठेगा कचरा

Haryana News: हरियाणा की ग्रामीण व्यवस्था और पर्यावरण को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद कड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के लिए जारी हुए इन नए निर्देशों के तहत अब गांवों के पारंपरिक जोहड़ों (तालाबों) को पूरी तरह कचरा मुक्त किया जाएगा।

इस अभियान का सीधा मकसद स्वच्छ जलवायु को बढ़ावा देना और जोहड़ों में जमा होने वाले गंदे कचरे के कारण पाताल में जा रहे दूषित पानी को रोकना है ताकि भूजल स्तर (Groundwater) को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इतिहास में पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों के जल स्रोतों को बचाने के लिए सीधे पंचायतों की जवाबदेही तय करते हुए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

गांव के स्तर पर तय हुई जिम्मेदारी, बीडीपीओ संभालेंगे कमान

वास्तव में ग्रामीण इलाकों में बारिश और रोजमर्रा के पानी को सहेजने का सबसे बड़ा और प्राकृतिक माध्यम ये जोहड़ ही रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इनमें सीधे तौर पर कूड़ा-कचरा फेंकने की प्रवृत्ति बढ़ गई थी, जिसका सीधा असर सेहत और पर्यावरण पर पड़ रहा था।

अब इस मुहिम को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) को ब्लॉक स्तर पर नोडल अफसर नियुक्त किया है। वहीं, जमीनी स्तर पर इसकी पूरी जिम्मेदारी गांव के सरपंच, वार्ड पंच और पंचायत सचिव के कंधों पर डाली गई है, जो इस बात की निगरानी करेंगे कि कोई तालाब में गंदगी न फैलाए।

जाली और चारदीवारी का सहारा, मनमर्जी करने वालों पर कसेगा शिकंजा

अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए पंचायतों को विशेष अधिकार और सुझाव दिए गए हैं। पंचायतें चाहें तो जोहड़ों के चारों तरफ लोहे की मजबूत जाली लगवा सकती हैं, ताकि कोई चाहकर भी उसमें प्लास्टिक या अन्य वेस्ट न डाल सके। जिन पंचायतों के पास बजट या सरकारी अनुदान अच्छा है, उन्हें जोहड़ों के आसपास पक्की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) करवाने की सलाह दी गई है।

इस अभियान की समय-सीमा पूरी होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें अचानक गांवों का दौरा करेंगी। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी जोहड़ में कचरा या गंदगी तैरती पाई गई, तो सीधे ग्राम पंचायत को जिम्मेदार मानते हुए 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा।

एक साल तक चलेगा जागरूकता का पाठ, डोर-टू-डोर उठेगा कचरा

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए पहले एक साल तक ग्रामीणों के बीच सघन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

लोगों को समझाया जाएगा कि जोहड़ का पानी साफ रहना क्यों जरूरी है। इसके साथ ही, गांवों को शहरों की तर्ज पर विकसित करते हुए हर घर से कचरा उठाने (डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन) की व्यवस्था शुरू होगी। इसके लिए ग्राम पंचायतें किसी निजी एजेंसी के साथ अनुबंध कर सकती हैं या फिर अपने स्तर पर सफाई कर्मचारियों के जरिए सीधे घरों से सूखा और गीला कचरा उठवा सकती हैं, ताकि कचरा जोहड़ों तक पहुंचे ही नहीं।