Nilokheri Best Mother Competition: कोमल बनीं नंबर वन मां, कुपोषण के खिलाफ आंगनवाड़ी सुपरवाइज़र्स ने दिया गुरुमंत्रमहिला बाल विकास विभाग का बड़ा एक्शन, 'बेस्ट मदर' प्रतियोगिता में ग्रामीण महिलाओं ने दिखाया दम

Nilokheri Best Mother Competition: (महाबीर मैहला) भावी पीढ़ी को तंदुरुस्त बनाने और ग्रामीण आंचल की महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग करने के उद्देश्य से नीलोखेड़ी के चार सर्कलों में ‘बेस्ट मदर’ प्रतियोगिता की धूम रही। महिला एवं बाल विकास विभाग की इस मुहिम के तहत नीलोखेड़ी, शामगढ़, सग्गा और निगदू सर्कलों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां शहरी और ग्रामीण अंचलों से आईं माताओं का उत्साह देखते ही बनता था। यह आयोजन महज एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सही पोषण को लेकर जागरूक करने की एक बड़ी पाठशाला साबित हुआ।

सवाल-जवाब के दौर से परखी गई माताओं की सूझबूझ, साझा किए अनुभव

प्रतियोगिता के दौरान शामिल हुईं माताओं की परीक्षा केवल किताबी ज्ञान से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के पालन-पोषण और व्यवहारिक सूझबूझ से ली गई। स्वास्थ्य अधिकारियों और सुपरवाइज़र्स ने महिलाओं से बच्चों के नियमित टीकाकरण (वैक्सीनेशन), मौसमी बीमारियों से बचाव, व्यक्तिगत स्वच्छता और पौष्टिक थाली से जुड़े कई जरूरी सवाल पूछे। दिलचस्प बात यह रही कि इस दौरान महिलाओं ने न केवल बेबाकी से जवाब दिए, बल्कि विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर अपने जमीनी अनुभव भी साझा किए, जिससे माहौल काफी जीवंत हो गया।

कड़े मुकाबले में कोमल और मुस्कान ने मारी बाजी, विजेताओं को मिला सम्मान

माताओं के ज्ञान, बच्चों की सेहत के रिकॉर्ड और उनकी सजगता को आधार बनाकर जब परिणाम घोषित किए गए, तो विजेताओं के चेहरे खिल उठे। प्रतियोगिता में कड़े मुकाबले के बीच नीलोखेड़ी शहरी क्षेत्र की कोमल ने पहला स्थान हासिल कर ‘बेस्ट मदर’ का खिताब अपने नाम किया। वहीं, बरथल गांव की रहने वाली कोमल दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि नीलोखेड़ी शहरी क्षेत्र की ही मुस्कान ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी विजेता माताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

“बच्चे देश का भविष्य और मां उनकी पहली ढाल”, सुपरवाइज़र्स ने बांधा समां

इस मौके पर विभाग की आंगनवाड़ी सुपरवाइजर नेहा, रितु और अनामिका ने संयुक्त रूप से माताओं को संबोधित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के आयोजनों का असली मकसद सिर्फ ट्रॉफियां बांटना नहीं, बल्कि हर घर की मां को बाल विकास के प्रति संवेदनशील बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा, “बच्चे ही हमारे देश का कल हैं और उनके शारीरिक व मानसिक विकास की पहली ढाल मां होती है। अगर माताएं बच्चों की डाइट, समय पर स्वास्थ्य जांच और साफ-सफाई पर थोड़ा सा भी ध्यान दें, तो हम कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ फेंक सकते हैं।” सुपरवाइज़र्स ने सभी महिलाओं से अपील की कि वे आंगनवाड़ी और सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं।