Indian Railways: भारतीय रेल की पटरियों पर अब बिना टिकट या अनाधिकृत तरीके से सफर करने की ‘फ्री-स्टाइल’ आदत पर ब्रेक लगने जा रहा है। अगर आप भी अक्सर ‘चलता है’ वाले ढर्रे पर बिना वैध टिकट के ट्रेन में चढ़ने का जोखिम लेते रहे हैं, तो संभल जाइए। रेलवे बोर्ड ने राजस्व घाटे को रोकने और ट्रेनों में उमड़ने वाली अनियंत्रित भीड़ को अनुशासित करने के लिए एक बड़ा हंटर चलाया है। रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 137 और 138 में संशोधन करते हुए प्रशासन ने न्यूनतम जुर्माने की राशि को 250 रुपये से सीधे बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है।
रेलवे का यह सख्त रूप आगामी 1 जुलाई 2026 से जमीनी स्तर पर दिखने लगेगा। हालांकि, अधिकतम सजा और किराए की मूल गणना से जुड़े बाकी नियमों में कोई फेरबदल नहीं किया गया है।
केवल बिना टिकट ही नहीं, ‘जुगाड़’ वाले सफर पर भी कस गया शिकंजा
अक्सर देखा जाता है कि कई यात्री जनरल टिकट लेकर स्लीपर क्लास में सवार हो जाते हैं या फिर कम दूरी का टिकट लेकर लंबी दूरी तय करने की फिराक में रहते हैं। रेलवे ने साफ कर दिया है कि नया नियम सिर्फ पूरी तरह ‘बिना टिकट’ घूमने वालों के लिए ही नहीं है, बल्कि इस तरह की ‘अनियमित’ यात्रा करने वाले शातिर यात्रियों पर भी समान रूप से लागू होगा।
यदि कोई यात्री अपनी श्रेणी के विपरीत गलत बोगी में यात्रा करता है या नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो टीटीई (TTE) उसकी रसीद फाड़ते वक्त न्यूनतम 500 रुपये की अतिरिक्त पेनल्टी जोड़ेगा। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से उन मध्यमवर्गीय और ईमानदार यात्रियों को राहत मिलेगी जो महीनों पहले कंफर्म टिकट बुक कराते हैं और फिर भी भीड़ के कारण अपनी ही सीट पर बैठ नहीं पाते।
पटरियों पर अनुशासन का नया दौर: अन्य नियम भी हुए सख्त
रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस कड़े फैसले के पीछे मुख्य मकसद सिर्फ राजस्व कमाना नहीं, बल्कि सफर को सुरक्षित और मर्यादित बनाना है। ट्रेनों और प्लेटफॉर्म्स पर अनुशासन बनाए रखने के लिए इस अभियान को और व्यापक रूप दिया जा रहा है। अब बिना अनुमति रेलवे परिसर में प्रवेश करने वाले, अनधिकृत रूप से वेंडिंग (सामान बेचने) करने वाले, और सबसे महत्वपूर्ण— महिलाओं के लिए आरक्षित बोगियों में अवैध रूप से सफर करने वाले पुरुष यात्रियों के खिलाफ भी रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और फ्लाइंग स्क्वॉड को विशेष शक्तियां दी जा रही हैं।
अगर कोई यात्री चेकिंग स्टाफ या रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ भी तत्काल ऑन-द-स्पॉट कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
1 जुलाई से लागू होगा नया सिस्टम
रेलवे ने अपने सभी जोनों और डिविजनों को सर्कुलर जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि 1 जुलाई 2026 से पहले इस बदलाव को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि यात्रियों को इसकी भलीभांति जानकारी हो सके। अधिकारियों ने यह भी दोहराया है कि धारा 137 (धोखाधड़ी के इरादे से बिना टिकट यात्रा) और धारा 138 (बिना इरादे के या मजबूरी में अनियमित यात्रा) के तहत केवल ‘न्यूनतम बेस पेनल्टी’ को अपग्रेड किया गया है, बाकी कानूनी कानूनी ढांचा और अदालती कार्यवाही के प्रावधान पहले की तरह ही जस के तस बने रहेंगे। कुल मिलाकर, रेलवे अब ‘सफर भी और सम्मान भी’ के फार्मूले पर चलते हुए पटरियों पर कानून का राज पुख्ता करने की तैयारी में है।

