Kaithal School News: कैथल के जाट शाइनिंग स्टार स्कूल में बड़ा बदलाव: अब खेल-खेल में गणित सीखेंगे बच्चे, सीबीएसई कार्यशाला संपन्न
जाट शाइनिंग स्टार स्कूल में दो दिवसीय गणित कार्यशाला का शानदार और सकारात्मक समापन
Kaithal School News: (संजय शर्मा) गणित का नाम सुनते ही अक्सर बच्चों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आती हैं, लेकिन इसी कठिन माने जाने वाले विषय को खेल-खेल में और बिना किसी मानसिक दबाव के कैसे सिखाया जाए, इसे लेकर कैथल में एक शानदार अकादमिक पहल देखने को मिली। स्थानीय जाट शाइनिंग स्टार पब्लिक स्कूल के परिसर में सीबीएसई द्वारा संचालित दो दिवसीय ‘जॉयफुल मैथमेटिक्स’ क्षमता संवर्धन कार्यक्रम (Capacity Building Program) का रविवार को गरिमापूर्ण समापन हुआ। दो दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण शिविर का आगाज विद्यालय के प्रधानाचार्य पंकज गुप्ता और मुख्य वक्ताओं द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया था। इस कार्यशाला में कैथल और आसपास के 18 विभिन्न सीबीएसई स्कूलों के लगभग 60 गणित प्रवक्ताओं ने भाग लिया।
पानीपत और इस्माइलाबाद के दिग्गजों ने संभाली कमान; बताया— कैसे दूर करें ‘मैथ्स का फोबिया’
इस कार्यशाला को व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए सीबीएसई ने शिक्षा जगत के दो मझे हुए विशेषज्ञों को बतौर रिसोर्स पर्सन भेजा था। पानीपत से पधारे डॉ. यतिन रावल और इस्माइलाबाद से आए डॉ. गौरव गर्ग ने अपने बेहद संवादात्मक और दिलचस्प सत्रों के माध्यम से उपस्थित शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। इन दोनों विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी कई कक्षाओं में गणित को केवल फॉर्मूले रटाकर पढ़ाया जाता है, जिससे बच्चों में इसका ‘फोबिया’ बैठ जाता है। उन्होंने शिक्षकों को ‘रीक्रिएशनल मैथमेटिक्स’ और कक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के प्रभावी उपयोग के लाइव उदाहरण दिए। साथ ही, उन बारीक और आम गलतियों का भी विश्लेषण किया गया जो छात्र अक्सर परीक्षा के दबाव में या कॉन्सेप्ट स्पष्ट न होने के कारण करते हैं।
“गणित सिर्फ अंकों का खेल नहीं, यह तार्किक सोच का आधार है” — प्रधानाचार्य पंकज गुप्ता
शिक्षकों को प्रेरित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य पंकज गुप्ता ने एक बेहद गंभीर और विचारणीय बात कही। उन्होंने रेखांकित किया कि गणित को केवल अंकों और समीकरणों के एक बंद दायरे में रखकर नहीं देखा जाना चाहिए। असल में, गणित विद्यार्थियों के भीतर ‘लॉजिकल थिंकिंग’ (तर्कसंगत सोच) और ‘प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स’ (समस्या समाधान क्षमता) को विकसित करने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी कक्षाओं में एक ऐसा सकारात्मक माहौल (पॉजिटिव कल्चर) तैयार करें, जहां बच्चा सवाल पूछने से डरे नहीं, बल्कि गणित की पहेलियों को सुलझाने में आनंद का अनुभव करे।
नई ऊर्जा और नवाचार के संकल्प के साथ विदा हुए शिक्षक
कार्यशाला के अंतिम सत्र में शिक्षकों के बीच समूह चर्चा और कुछ व्यावहारिक गतिविधियां कराई गईं, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ अपनी सहभागिता दर्ज की। समापन के अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज गुप्ता ने दोनों मुख्य रिसोर्स पर्सन्स, डॉ. यतिन रावल और डॉ. गौरव गर्ग को उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए विशेष ट्रॉफी और उपहार भेंट कर सम्मानित किया। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागी शिक्षकों के चेहरों पर एक नई ऊर्जा और संतोष का भाव साफ देखा जा सकता था। शिक्षकों ने माना कि यहां से सीखे गए नवाचार और आधुनिक तरीके निश्चित रूप से उनकी कक्षाओं का माहौल बदलने और गणित को बच्चों का पसंदीदा विषय बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
