July 3, 2026

Masik Janmashtami 2026: 7 जुलाई को रखें मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त

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Masik Janmashtami 2026: 7 जुलाई को रखें मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त

Masik Janmashtami July 2026: श्रीकृष्ण पूजा का सही समय और व्रत के नियम

Masik Janmashtami 2026 date: आषाढ़ मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत इस वर्ष 7 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। जानिए तिथि, निशीथ पूजा मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत के नियम।

सनातन धर्म में प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 7 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा, व्रत और मंत्र जाप कर सुख-समृद्धि, संतान सुख तथा जीवन में मंगल की कामना करते हैं।

श्रीकृष्ण का जन्म निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में हुआ माना जाता है। इसी कारण अष्टमी तिथि दो दिनों तक रहने के बावजूद व्रत 7 जुलाई को रखा जाएगा और मध्यरात्रि में विशेष पूजा की जाएगी।

आषाढ़ मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 7 जुलाई 2026 को दोपहर 12:06 बजे शुरू होगी और 8 जुलाई 2026 को दोपहर 12:40 बजे समाप्त होगी। चूंकि व्रत में निशीथ काल का विशेष महत्व होता है, इसलिए श्रद्धालु 7 जुलाई, मंगलवार को ही मासिक जन्माष्टमी का उपवास रखेंगे।

यह तिथि भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए मासिक आराधना का विशेष अवसर मानी जाती है।

मासिक जन्माष्टमी 2026 का निशीथ पूजा मुहूर्त क्या है?

द्रिक पंचांग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा के लिए निशीथ पूजा मुहूर्त 8 जुलाई 2026 को मध्यरात्रि 12:06 बजे से 12:46 बजे तक रहेगा।

करीब 40 मिनट का यह समय बाल गोपाल के अभिषेक, पूजा, मंत्र जाप और आरती के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें। पूरे दिन सात्विक जीवनशैली अपनाएं और अपनी परंपरा के अनुसार उपवास या फलाहार करें।

रात्रि में शुभ मुहूर्त के दौरान बाल गोपाल या भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद नए वस्त्र अर्पित करें और तुलसी दल, माखन, मिश्री, दूध, दही, फल तथा पंजीरी का भोग लगाएं।

पूजा के अंत में श्रीकृष्ण चालीसा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।

मासिक जन्माष्टमी व्रत में किन बातों का ध्यान रखें?

श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के बिना भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है।

पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना शुभ माना जाता है। इस दिन सात्विक भोजन, संयमित व्यवहार और सकारात्मक विचार रखने की भी मान्यता है। व्रत का पारण अगले दिन पूजा और प्रसाद वितरण के बाद किया जाता है।

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मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व क्या है?

हिंदू धर्म के कई प्राचीन ग्रंथों में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत की महिमा का उल्लेख मिलता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, नारद पुराण, व्रतराज और हरिभक्तिविलास में इस व्रत को भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान बताया गया है।

विशेष रूप से हरिभक्तिविलास में इसे वैष्णव परंपरा के प्रमुख धार्मिक आचरणों में स्थान दिया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधिपूर्वक यह व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

Masik Janmashtami 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?

आषाढ़ मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को रखा जाएगा।

अष्टमी तिथि कब से कब तक रहेगी?

अष्टमी तिथि 7 जुलाई दोपहर 12:06 बजे से शुरू होकर 8 जुलाई दोपहर 12:40 बजे तक रहेगी।

निशीथ पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

8 जुलाई 2026 को मध्यरात्रि 12:06 बजे से 12:46 बजे तक निशीथ पूजा का शुभ समय रहेगा।

पूजा में क्या अर्पित करना चाहिए?

पंचामृत, तुलसी दल, माखन, मिश्री, दूध, दही, फल और पंजीरी का भोग लगाने की परंपरा है।

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