Prof Anil Kumar Sauda Kaithal: कैथल के प्रो. अनिल कुमार सौदा को पंचकूला में मिले दो राज्य स्तरीय साहित्यिक पुरस्कार, विधानसभा अध्यक्ष ने किया सम्मानितकैथल के प्रो. अनिल कुमार सौदा को पंचकूला में मिले दो राज्य स्तरीय साहित्यिक पुरस्कार

Prof Anil Kumar Sauda Kaithal: (संजय शर्मा) कैथल के साहित्यिक गलियारों के लिए बीते दिन एक बेहद गौरवशाली खबर लेकर आए। जिले के जाने-माने लेखक और शिक्षाविद प्रो. अनिल कुमार सौदा को उनकी बेजोड़ लेखनी और साहित्य साधना के लिए पंचकूला स्थित हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी भवन के सभागार में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में दो अलग-अलग प्रतिष्ठित पुरस्कारों से विभूषित किया गया। इस राज्य स्तरीय समारोह में हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की और प्रो. सौदा को प्रशस्ति पत्र व शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

‘सूझवान मोती’ और ‘ऐके दी बात’ ने बिखेरी चमक, मिली सम्मान राशि

अकादमी के आधिकारिक विवरण के अनुसार, प्रो. अनिल कुमार सौदा को वर्ष 2021 की राज्य स्तरीय कहानी प्रतियोगिता में उनकी मर्मस्पर्शी कहानी “सूझवान मोती” के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया, जिसके तहत उन्हें 5,000 रुपये की पुरस्कार राशि और प्रमाण पत्र दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानस पटल को छूने वाले उनके शानदार बाल काव्य संग्रह “ऐके दी बात” को वर्ष 2022 के सर्वश्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कार के लिए चुना गया। इस बड़े सम्मान के रूप में उन्हें 31,000 रुपये की नकद राशि व प्रशस्ति पत्र सौंपे गए। एक ही मंच से दो-दो बार सम्मानित होने की इस दुर्लभ उपलब्धि ने कैथल के समूचे बौद्धिक समाज का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है।

“बाबासाहेब के दिए अवसरों की बदौलत आज वंचित समाज भी रच रहा इतिहास”

सम्मान की इस ऐतिहासिक दहलीज पर खड़े होकर प्रो. अनिल कुमार सौदा भावुक भी हुए और कृतज्ञ भी। उन्होंने अपनी इस कामयाबी के पीछे माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुओं के मार्गदर्शन को रेखांकित करते हुए भारतीय संविधान के शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर को नमन किया। प्रो. सौदा ने बेहद नपे-तुले शब्दों में कहा, “आज अगर हमारे जैसा वंचित और पीड़ित समाज का कोई व्यक्ति अपनी मेहनत, कलम और प्रतिभा के दम पर प्रांतीय फलक पर पहचान बना पा रहा है, तो यह केवल बाबासाहेब आंबेडकर की दूरदर्शिता का परिणाम है, जिन्होंने हम सबको मुख्यधारा में आने के लिए अवसरों की समानता की गारंटी दी।” उन्होंने इस सफर में लगातार हौसला बढ़ाने के लिए वाल्मीकि समाज के प्रबुद्ध वर्ग का भी विशेष तौर पर शुक्रिया अदा किया।

साहित्यिक और सामाजिक संगठनों ने दी बधाई, उज्ज्वल भविष्य की कामना

प्रो. सौदा को मिली इस दोहरी कामयाबी को कैथल ही नहीं, बल्कि पूरे सूबे के साहित्यिक परिदृश्य के लिए एक बड़ी और सकारात्मक घटना माना जा रहा है। समारोह से लौटते ही उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकारों, कॉलेज के प्रोफेसरों, कवियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसे कला और वैचारिकता की जीत बताते हुए उम्मीद जताई कि प्रो. सौदा की कलम आने वाले समय में भी समाज को दिशा दिखाने वाले साहित्य का सृजन करती रहेगी।