Nilokheri News: नीलोखेड़ी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: ममा के स्मृति दिवस पर ब्रह्माकुमारीज केंद्र में हुई मौन साधनाNilokheri News: नीलोखेड़ी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: ममा के स्मृति दिवस पर ब्रह्माकुमारीज केंद्र में हुई मौन साधना

Nilokheri News: (महाबीर मैहला) नीलोखेड़ी के दिव्य अनुभूति भवन में अध्यात्म और आत्मिक शांति का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था ब्रह्माकुमारीज संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती, जिन्हें सभी आदर से ‘ममा’ पुकारते हैं, के स्मृति दिवस का। इस पावन दिन को मनाने के लिए केवल शहर ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से भी भाई-बहन सुबह से ही केंद्र पर जुटने शुरू हो गए थे। कार्यक्रम की शुरुआत एक गहरी मौन साधना (योग भट्टी) से हुई, जहां परिसर में मौजूद हर शख्स ने कुछ घंटों के लिए बाहरी शोर को भुलाकर अपनी आंतरिक ऊर्जा और आत्मिक शक्ति को टटोला।

सृष्टि एक रंगमंच और हम सब इसके अभिनेता: बीके संगीता

साधना सत्र के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए केंद्र की संचालिका बीके संगीता बहन ने जीवन और अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को बेहद सरल शब्दों में पिरोया। उन्होंने कहा, “यह पूरी सृष्टि एक कर्म क्षेत्र है, एक बहुत बड़ा रंगमंच है, जहां हम सभी आत्माएं अपना-अपना पूर्व निर्धारित अभिनय (पार्ट) निभा रही हैं। इस रंगमंच पर परमात्मा की भूमिका सबसे विशिष्ट है; वे इंसानों की तरह जन्म और मरण के चक्र में नहीं फंसते, बल्कि उनका काम भटकती हुई आत्माओं को बंधनों से मुक्त कर पवित्रता और आत्मिक उन्नति का सच्चा रास्ता दिखाना है।”

बीके संगीता ने आगे कहा कि जब मनुष्य अपने कर्मों को वासना, अहंकार और स्वार्थ से ऊपर उठाकर पवित्र बनाता है, तभी वे कर्म ‘अकर्म’ बनते हैं, यानी उनका कोई नकारात्मक बंधन नहीं बनता।

समर्पण का दूसरा नाम थीं ममा: ममा के व्यक्तित्व को याद करते हुए बीके संगीता भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि ममा का “हांजी” कहने का नियम इतना पक्का था कि ईश्वरीय कार्य या किसी भी परिस्थिति के सामने उनका अहंकार कभी आड़े नहीं आया। उनकी दिव्य और करुणामयी दृष्टि मात्र से लोगों के जीवन की दिशा बदल जाती थी। त्याग, सेवा और असीम विनम्रता ही उनके जीवन का मूलमंत्र थी।

पुष्पांजलि और संकल्पों का दौर, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

भाषण के बाद मुख्य हॉल में स्थापित मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने का सिलसिला शुरू हुआ। एक-एक कर सभी श्रद्धालुओं ने ममा को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए और आंखें मूंदकर उनके बताए आध्यात्मिक मूल्यों व संस्कारों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का मौन संकल्प लिया।

इस भावभीनी श्रद्धांजलि सभा में गुरमेज भाई, अमित भाई, जोगिंदर भाई, हेमराज भाई, हेमंत मेहता भाई, सुमन बहन, ललिता बहन, किरण बहन और निर्मल बहन सहित इलाके के कई प्रबुद्ध और समर्पित श्रद्धालु मुख्य रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन बेहद अनुशासित तरीके से तैयार किए गए सात्विक ‘ब्रह्मा भोज’ के वितरण के साथ हुआ।