Sonipat Encounter: हरियाणा के सोनीपत में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत सोमवार की सुबह एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी। पुलिस की सीआईए-1 गन्नौर टीम ने नहर के पास तड़के हुई एक तीखी मुठभेड़ में कुख्यात बदमाश गोपाल उर्फ गोपी को मार गिराया। खुद को पुलिस से घिरा देख बदमाश ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं, जिसके जवाब में पुलिस को भी मोर्चा संभालना पड़ा। इस मुठभेड़ में एक जांबाज हेड कॉन्स्टेबल देवेंद्र भी गोली लगने से जख्मी हुए हैं, जिन्हें आनन-फानन में खानपुर कलां मेडिकल कॉलेज के आईसीयू वार्ड में दाखिल कराया गया है।
मुखबिर की सटीक सूचना पर गन्नौर सीआईए ने बिछाया था जाल Sonipat Encounter
पुलिस कमिश्नर ममता सिंह के मुताबिक, विभाग को सोमवार सुबह करीब साढ़े 5 बजे एक पुख्ता इनपुट मिला था। सूचना थी कि उम्रकैद की सजा काट रहा और पैरोल से फरार चल रहा गोपाल बिना नंबर की बाइक से एमपी माजरा और खूबडू के रास्ते अपने गांव अटायल की तरफ आ रहा है। सीआईए-1 के प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव ने बिना वक्त गंवाए अपनी टीम के साथ इलाके की नाकेबंदी कर दी।
जैसे ही पुलिस की गाड़ी गोपाल के नजदीक पहुंची, उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपनी पिस्टल निकाल ली और भागने की नीयत से सीधे पुलिस के वाहन को निशाना बनाकर गोलियां दागनी शुरू कर दीं।
दोनों तरफ से चलीं 18 गोलियां, मौके से हथियारों का जखीरा बरामद
बदमाश गोपाल इस कदर बेखौफ था कि उसने पुलिस टीम पर एक के बाद एक करीब 9 राउंड फायर किए। इसी दौरान एक गोली हेड कॉन्स्टेबल देवेंद्र के बाएं हाथ को चीरती हुई निकल गई। आत्मरक्षार्थ और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई की और 9 राउंड गोलियां चलाईं, जिसमें गोपाल को मौके पर ही ढेर कर दिया गया।
मुठभेड़ थमने के बाद जब फॉरेंसिक और स्थानीय पुलिस ने तफ्तीश की, तो घटनास्थल से दो अवैध हथियार, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, खोखे और वह बिना नंबर की मोटरसाइकिल बरामद हुई जिससे वह वारदात को अंजाम देने जा रहा था।
पैरोल पर आकर फिर शुरू किया खूनी खेल, गांव के ही शख्स की हत्या की थी फिराक
मारे गए बदमाश का आपराधिक इतिहास दहला देने वाला है। गोपाल पर पहले से ही मर्डर और डकैती जैसे 25 से अधिक गंभीर मामले दर्ज थे और कोर्ट उसे दो अलग-अलग हत्याओं में उम्रकैद की सजा सुना चुका था। करीब ढाई महीने पहले वह 70 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आया था, लेकिन अवधि खत्म होने के बाद वापस जेल नहीं लौटा।
पैरोल के दौरान ही उसने मई में जमीन विवाद को लेकर अपने ही गांव में फायरिंग की, फिर एक शराब ठेके पर लूटपाट के इरादे से आगजनी की वारदात को अंजाम दिया। सोमवार सुबह भी वह अपने गांव के ही एक पुराने दुश्मन की जान लेने की फिराक में घूम रहा था, लेकिन इससे पहले कि वह तीसरी हत्या करता, पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

