Haryana Barrier free toll: अगर आप दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे से सफर करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर है। करनाल का बसताड़ा टोल प्लाजा अब पूरी तरह बदलने जा रहा है।
23 जून से यहां देश की अत्याधुनिक ‘मल्टी लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) तकनीक को लागू कर दिया जाएगा। इस सिस्टम के शुरू होते ही टोल प्लाजा से बूम-बैरियर, बूथ और गाड़ियों की लंबी कतारें गुजरे जमाने की बात हो जाएंगी। अब वाहन चालकों को टोल पर रुकने या रसीद कटवाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे न केवल करोड़ों लीटर ईंधन बचेगा बल्कि दिल्ली-जम्मू कॉरिडोर पर सफर का समय भी काफी घट जाएगा।
जानिए कैसे काम करेगी यह नई तकनीक, स्पीड कम करने की भी जरूरत नहीं
बसताड़ा टोल के मैनेजर मुकेश कुमार के मुताबिक, इस नई व्यवस्था के तहत हाईवे के ऊपर एक विशाल गैंट्री (लोहे का ढांचा) लगाई गई है। इस पर एडवांस ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे, आरएफआईडी रीडर, लाइडार सेंसर और एक्सल डिटेक्टर फिट किए गए हैं।
जैसे ही कोई गाड़ी सामान्य या तेज गति से यहां से गुजरेगी, ये सेंसर पलक झपकते ही गाड़ी की श्रेणी पहचान कर फास्टैग से सीधे पैसे काट लेंगे। राहत की बात यह है कि इसके लिए चालकों को स्पीड कम करने की कोई जरूरत नहीं है; अथॉरिटी ने 120 किमी/घंटे की रफ्तार पर इसका सफल परीक्षण किया है।
नकद लेन-देन गुजरे जमाने की बात, बिना फास्टैग वालों को सीधे घर पहुंचेगा ई-नोटिस
इस टोल प्लाजा पर अब कैश काउंटर पूरी तरह इतिहास बन चुके हैं। अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग नहीं है, या उसमें बैलेंस खत्म हो चुका है, तो भी गाड़ी रोकी नहीं जाएगी। कैमरे सीधे आपकी नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और वाहन मालिक के रजिस्टर्ड पते व मोबाइल पर ई-नोटिस भेज दिया जाएगा।
इसके बाद वाहन मालिक को डिजिटल माध्यम से 72 घंटे के भीतर टोल का भुगतान करना होगा। यदि तय समय सीमा के अंदर पैसे नहीं चुकाए गए, तो न केवल टोल राशि दोगुनी हो जाएगी, बल्कि भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ सीधे आरटीओ के जरिए चालान की कार्रवाई होगी।
स्थानीय पास और कर्मचारियों के भविष्य पर क्या होगा असर?
इस हाई-टेक बदलाव के बीच स्थानीय लोगों के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया है। टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए 350 रुपये का मासिक पास प्रस्तावित है। यह पास पूरे कैलेंडर महीने के लिए वैध रहेगा और इसके जरिए प्राइवेट वाहनों को असीमित (अनलिमिटेड) फेरे लगाने की इजाजत होगी, हालांकि कमर्शियल गाड़ियों को यह छूट नहीं मिलेगी।
इस आधुनिक तकनीक का एक स्याह पहलू भी है; पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और बैरियर-मुक्त होने के कारण टोल बूथ पर काम करने वाले लगभग 200 से 250 कर्मचारियों की छंटनी तय मानी जा रही है, क्योंकि अब वहां केवल तकनीकी स्टाफ और सुरक्षाकर्मी ही तैनात रहेंगे।

