China unmasked viral: खुद को 21वीं सदी की इकलौती महाशक्ति और भविष्य की दुनिया के रूप में पेश करने वाले चीन की पीआर (पब्लिक रिलेशंस) मशीनरी को एक सोशल मीडिया वीडियो ने घुटनों पर ला दिया है।
हम अक्सर जिन चीनी शहरों की चमचमाती गगनचुंबी इमारतें, हाई-टेक एयरपोर्ट और हवा से बातें करती बुलेट ट्रेनें देखकर अचंभित होते हैं, उनकी ओट में एक दूसरी हकीकत भी सांस ले रही है। इंस्टाग्राम के एक चर्चित अकाउंट ‘china_unmasked’ द्वारा जारी की गई चंद मिनटों की फुटेज ने ड्रैगन के उस सुनहरे दावों के गुब्बारे की हवा निकाल दी है, जिसे वह पूरी दुनिया में बड़े चाव से बेचता है।
पर्यटकों की नजरों से दूर ‘बदहाल बीजिंग’ की तस्वीरें
इस वायरल वीडियो में किसी सुदूर ग्रामीण इलाके को नहीं, बल्कि देश की सत्ता के केंद्र यानी बीजिंग के उन हिस्सों को कैमरे में कैद किया गया है, जहां विदेशी सैलानियों का जाना लगभग नामुमकिन होता है।
वीडियो की तस्वीरों में चीन की वह भव्यता गायब है जो सरकारी विज्ञापनों में दिखती है। इसके उलट, यहां सड़कों के दोनों तरफ लगे कचरे के विशाल ढेर, संकरी गलियां, ढहते हुए मकान और जर्जर हो चुका इंफ्रास्ट्रक्चर साफ गवाही दे रहा है कि साम्यवादी देश के दिल में कितनी बदहाली छिपी है। साफ-सफाई के मामले में इन इलाकों की हालत किसी भी पिछड़े देश जैसी ही नजर आती है।
दो फाड़ में बंटा चीन: एक तरफ हाई-टेक चकाचौंध, दूसरी तरफ आधी आबादी लाचार
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और आर्थिक विश्लेषकों की मानें तो चीन ने पिछले तीन दशकों में अभूतपूर्व तरक्की जरूर की है और करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है।
लेकिन इस विकास का एक स्याह पहलू यह भी है कि यह तरक्की बेहद असमान रही है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने अपना पूरा ध्यान और बजट बीजिंग, शंघाई या शेन्ज़ेन जैसे बड़े कोस्टल और कमर्शियल शहरों को चमकाने में झोंक दिया। नतीजा यह हुआ कि इन शहरों के ठीक बगल में बसे उपनगरीय और दूरदराज के इलाकों में आज भी लोग खस्ताहाल सड़कें, दोयम दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएं और लचर पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी बुनियादी समस्याओं से रोजाना जूझ रहे हैं।
प्रोपेगैंडा बनाम जमीनी हकीकत की खुली बहस
दरअसल, बीजिंग प्रशासन अपनी वैश्विक छवि को लेकर बेहद संवेदनशील रहता है। विदेशी निवेशकों और पर्यटकों के दिमाग पर एक सकारात्मक और शक्तिशाली प्रभाव छोड़ने के लिए चुनिंदा टूरिस्ट स्पॉट्स और वीआईपी रूट्स के सुंदरीकरण पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है।
यही वजह है कि जब भी ऐसी कोई अंदरूनी तस्वीर दुनिया के सामने आती है, तो विकास के इस चीनी मॉडल पर बहस छिड़ जाती है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और टाइमलाइन की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसने यह कड़वा सच जरूर उजागर कर दिया है कि किसी भी मुल्क की तरक्की का पैमाना उसकी चुनिंदा आलीशान इमारतें नहीं, बल्कि उसका सबसे आखिरी छोर पर खड़ा नागरिक होता है।

