नई दिल्ली, 23 जून, 2026 (Telegram ban countries)। देश में आयोजित हुई नीट-यूजी री-एग्जामिनेशन (NEET-UG Re Examination) से ठीक पहले सरकार ने सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर कड़ी पाबंदियां आयद की थीं, जो पेपर खत्म होने के बाद भी लगातार जारी हैं। केंद्र सरकार के इस सख्त रुख के बीच यह साफ हो गया है कि साइबर सुरक्षा और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों को लेकर देश की जांच एजेंसियां अब इस ऐप को कतई ढील देने के मूड में नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर भारत इस मैसेजिंग ऐप के खिलाफ इतनी बड़ी विधिक कार्रवाई करने वाला पहला मुल्क नहीं है। फंस गया टेलीग्राम का चक्रव्यूह।
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भी साइबर सुरक्षा और इंटरनेट पर धड़ल्ले से फैलने वाली गलत जानकारियों पर लगाम कसने के लिए टेलीग्राम की सर्विस पर कई तरह के कड़े बैन और पाबंदियां लगा रखी हैं। थाईलैंड की हुकूमत ने साल 2020 में लोकतंत्र के समर्थन में उतरे प्रदर्शनकारियों द्वारा रैलियों को मोबिलाइज करने के लिए इस ऐप का धड़ल्ले से इस्तेमाल करने के बाद इस पर पूरी तरह ब्लॉक लगा दिया था। साल 2021 के दौरान क्यूबा में जब सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन भड़के, तब वहां के प्रशासन ने भी सबसे पहला वार टेलीग्राम की कनेक्टिविटी पर करते हुए इसकी सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया था।
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लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील ने हालांकि अब तक टेलीग्राम पर कोई परमानेंट या स्थायी प्रतिबंध तो नहीं थोपा है, लेकिन वहां की शीर्ष अदालतों ने कई मौकों पर इस प्लेटफॉर्म को देश भर में सस्पेंड करने का कड़ा हुक्म सुनाया है। ब्राजीलियाई अदालतों का साफ आरोप है कि टेलीग्राम उनके देश में धड़ल्ले से शेयर होने वाले चरमपंथी कंटेंट, फेक न्यूज और गंभीर आपराधिक जांच से जुड़े न्यायिक आदेशों का पालन करने में लगातार आनाकानी करता रहा है। भुगतनी पड़ी सजा।
चीन और ईरान में बरसों से है ताला
न्यू यॉर्क टाइम्स (NYT) की एक पुरानी रिपोर्ट गवाही देती है कि कभी ईरान पूरी दुनिया में टेलीग्राम के लिए सबसे कमाऊ और बड़े बाजारों में से एक माना जाता था, जहां करोड़ों एक्टिव यूजर्स दिन-रात इस मैसेजिंग सर्विस का इस्तेमाल करते थे। साल 2018 में वहां भड़के भयंकर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद ईरानी अधिकारियों ने इस ऐप को हमेशा-हमेशा के लिए मुल्क में दफन कर दिया। अधिकारियों ने ऑन-रिकॉर्ड आरोप जड़ा था कि प्रदर्शनकारी सड़कों पर बवाल काटने और रैलियां आयोजित करने के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे थे।
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी महाशक्ति चीन ने साल 2015 से ही अपने अभेद्य ‘ग्रेट फ़ायरवॉल’ नाम के विशाल इंटरनेट सेंसरशिप सिस्टम के जरिए टेलीग्राम को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट कर रखा है। चीनी कम्युनिस्ट सरकार की तफ्तीश और खुफिया एजेंसियां लंबे समय से इस ऐप को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानती रही हैं, क्योंकि यह एक्टिविस्टों, वकीलों और वामपंथी राजनीतिक आयोजकों के बीच बातचीत का मुख्य जरिया बन चुका था। साल 2019 में जब हांगकांग के भीतर बीजिंग विरोधी प्रदर्शन उग्र हुए, तब प्रदर्शनकारियों ने अपनी सीक्रेट रैलियों के पल-पल के अपडेट्स शेयर करने के लिए इसी एन्क्रिप्टेड ऐप का सहारा लिया था।

