Organ Donation: जगाधरी के 27 वर्षीय कुलदीप की मौत के बाद परिवार ने लिया अंगदान का ऐतिहासिक फैसला, 4 मरीजों को मिला नया जीवन
जगाधरी के 27 वर्षीय कुलदीप की मौत के बाद परिवार ने लिया अंगदान का ऐतिहासिक फैसला
Organ Donation: अक्सर लोग अपनी त्रासदी और गम के आगे कुछ नहीं सोच पाते, लेकिन जगाधरी के एक परिवार ने अपने नौजवान बेटे की असमय मृत्यु के बाद जो साहस और संवेदनशीलता दिखाई, उसने चार परिवारों के जीवन में नई उम्मीदें जगा दी हैं। यमुनानगर के जगाधरी क्षेत्र में रहने वाले 27 वर्षीय कुलदीप सिंह की सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। इस भीषण दुख के बीच कुलदीप की मां और छोटे भाई ने अंगदान का साहसिक निर्णय लिया, जिसके चलते आज चार जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी संवर सकी है।
स्पीड ब्रेकर पर अनियंत्रित होकर गिरी थी स्कूटी, पीजीआई में घोषित किया गया ब्रेन डेड
हादसे की जानकारी देते हुए बताया गया कि कुलदीप सिंह बीती 15 सितंबर को अपनी स्कूटी से कहीं जा रहे थे, तभी रास्ते में स्पीड ब्रेकर के पास संतुलन बिगड़ने से वे नीचे गिर पड़े और उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। पहले उन्हें यमुनानगर के नागरिक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत चिंताजनक होने पर उन्हें तुरंत पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद कुलदीप के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। 17 सितंबर को पीजीआई की मेडिकल बोर्ड और ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन कमेटी ने तय प्रक्रिया के अनुसार उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘ब्रेन स्टेम डेड’ घोषित कर दिया।
गमजदा मां और भाई ने जताई सहमति, 2 मरीजों को मिलीं किडनियां और 2 को आंखों की रोशनी
बेटे और बड़े भाई को खोने के असह्य दर्द के बावजूद मां बीरा रानी और छोटे भाई परमिंदर ने ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की काउंसलिंग के बाद हिम्मत दिखाई। परिवार ने कुलदीप के सभी संभव अंग और दोनों कॉर्निया दान करने का फैसला किया। पीजीआई की मेडिकल टीम ने सफलतापूर्वक अंग निकालकर दो ऐसे मरीजों में किडनियां ट्रांसप्लांट कीं, जो लंबे समय से किडनी फेलियर की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। इसके अलावा उनकी दोनों कॉर्निया का इस्तेमाल दो कॉर्नियल दृष्टिहीनता से पीड़ित मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए किया गया।
‘जाते-जाते दूसरों की दुनिया रोशन कर गया मेरा लाल’, भावुक हुई मां; भाई ने की सड़क सुरक्षा की अपील
एक स्टील फैक्ट्री में साधारण नौकरी करने वाले कुलदीप अपने परिवार के मुख्य संबल थे। उनकी मां बीरा रानी ने रोते हुए कहा, “अपने कलेजे के टुकड़े को खोने का गम शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन जब यह सोचती हूं कि उसके अंगों के जरिए किसी के घर की खुशियां लौट आई हैं और उसकी आंखों से कोई यह दुनिया देख पा रहा है, तो मन को एक सुकून मिलता है।” वहीं, कुलदीप के छोटे भाई परमिंदर ने लोगों से यातायात नियमों के पालन की अपील करते हुए कहा कि जैसी त्रासदी उनके परिवार पर बीती है, वैसा दर्द किसी और को न झेलना पड़े, इसके लिए वे खुद सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाएंगे।
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