Patti City Police Station Staff Shortage : 50 हजार से अधिक आबादी और 19 वार्डों वाले ऐतिहासिक शहर पट्टी की कानून-व्यवस्था इस समय गंभीर संकट से जूझ रही है। हाल ही में हुई गोलीबारी की घटनाओं ने शहर की सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस थाने पर पूरे शहर की हिफाजत का जिम्मा है, वहां कर्मचारियों का भारी टोटा चल रहा है। एक तरफ अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस विभाग खाली पड़े पदों की मार झेल रहा है।
कागजों पर सुरक्षा, हकीकत में स्टाफ का भारी अकाल
पट्टी शहर का दायरा और आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले सुरक्षा व्यवस्था सिकुड़ती जा रही है। मौजूदा स्थिति यह है कि थाना सिटी पट्टी में स्वीकृत पदों के मुकाबले भारी रिक्तियां चल रही हैं। थाने में इंस्पेक्टर का पद खाली पड़ा है, जबकि एक सब-इंस्पेक्टर, केवल 3 एएसआई, 1 हेड कांस्टेबल, 17 कांस्टेबल और 5 होमगार्ड के सहारे पूरे शहर की कानून-व्यवस्था को संभाला जा रहा है।
यदि आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो थाने में इंस्पेक्टर, एसआई, एएसआई, हेड कांस्टेबल, कांस्टेबल और होमगार्ड के कुल मिलाकर दर्जनों पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।
सीमित बल के कंधों पर शिकायतों से लेकर गश्त तक का बोझ
जब शहर में आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हों, तब नियमित गश्त, मामलों की जांच, अदालती कार्रवाई और संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए पर्याप्त पुलिस बल का होना अनिवार्य है। लेकिन स्टाफ की भारी कमी के कारण मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का अत्यधिक बोझ पड़ रहा है। हालात यह हैं कि आपातकालीन स्थिति में तुरंत पुलिस सहायता पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
बढ़ते अपराध और अपराधियों के बेखौफ अंदाज के बाद शहरवासियों में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इतनी बड़ी आबादी की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
अधिकारियों का दावा, जल्द दूर होगी समस्या
इस गंभीर मामले पर जब थाना सिटी पट्टी के प्रभारी विपिन कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मचारियों की कमी के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों और डीजीपी पंजाब के मुख्यालय को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है।
वहीं, तरनतारन के एसएसपी सुरिंदर कुमार लांबा ने कहा कि पूरे जिले में पुलिस बल की कमी है और डीजीपी साहब से चर्चा कर सीमावर्ती क्षेत्रों के थानों में जल्द ही कर्मचारियों की कमी को पूरा किया जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इस दिशा में कितनी जल्दी ठोस कदम उठाते हैं।
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