September 23, 2026

Punjab News: भोला ड्रग केस की जांच करने वाले पूर्व ED अफसर निरंजन सिंह अमृतपाल की पार्टी में शामिल

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Punjab News: भोला ड्रग केस की जांच करने वाले पूर्व ED अफसर निरंजन सिंह अमृतपाल की पार्टी में शामिल

पूर्व ED अफसर निरंजन सिंह अमृतपाल की पार्टी में शामिल

Punjab News: पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व ED डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की सदस्यता ले ली है। बुधवार को चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और विधायक मनप्रीत सिंह अयाली समेत पार्टी नेताओं की मौजूदगी में उन्हें पार्टी में शामिल किया गया। पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों ने भी इसी कार्यक्रम में पार्टी जॉइन की। निरंजन सिंह ने राजनीति में आने के फैसले को लेकर कहा कि वह राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं और पहले उनकी राजनीति में आने की इच्छा भी नहीं थी। उन्होंने पंजाब में नशे, भ्रष्टाचार और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को अपने हितों तक सीमित रहने के बजाय व्यवस्था से सवाल करने चाहिए। निरंजन सिंह ने पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सरकारें इस समस्या को खत्म करने के दावे करती रही हैं, लेकिन समस्या बनी हुई है। पार्टी में शामिल होने से पहले उन्होंने कहा था कि वह वारिस पंजाब दे के नेताओं को इस मुद्दे पर गंभीर मानते हैं।

 

 

6 हजार करोड़ के चर्चित ड्रग केस से जुड़ी रही जांच

निरंजन सिंह ED के जालंधर कार्यालय में लंबे समय तक तैनात रहे। उनके कार्यकाल के दौरान पंजाब से जुड़े कई मनी लॉन्ड्रिंग और FEMA मामलों की जांच हुई। इनमें जगदीश सिंह भोला से जुड़े ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच भी शामिल थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वह इस मामले में जांच अधिकारी की भूमिका में रहे थे। ED ने 2013 में पंजाब में दर्ज कई FIR के आधार पर PMLA के तहत जांच शुरू की थी। मामला जगदीश सिंह भोला और अन्य आरोपियों से जुड़े ड्रग कारोबार की कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित था। ED के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इस मामले में कुल 23 आरोपी थे, जिनमें से 4 की ट्रायल के दौरान मौत हो गई और 2 को घोषित अपराधी किया गया।

उपलब्ध 17 आरोपियों को विशेष PMLA अदालत ने 30 जुलाई 2024 को दोषी ठहराया। यहां एक आंकड़े को स्पष्ट करना जरूरी है। आपके मूल इनपुट में 24 आरोपियों की 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति अटैच होने की बात है, लेकिन ED की आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार इस मामले में कुल 95 करोड़ रुपये की संपत्तियां प्रोविजनली अटैच की गई थीं और अदालत ने 12.37 करोड़ रुपये की संबंधित संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया था। इसलिए खबर में आधिकारिक आंकड़े को प्राथमिकता दी गई है।

 

 

मजीठिया से पूछताछ के बाद ट्रांसफर को लेकर हुआ था विवाद

निरंजन सिंह इस मामले में उस समय भी चर्चा में आए थे, जब ED ने दिसंबर 2014 में तत्कालीन पंजाब राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से पूछताछ की थी। रिपोर्टों के अनुसार, 26 दिसंबर 2014 को मजीठिया से जालंधर स्थित ED कार्यालय में पूछताछ हुई थी और निरंजन सिंह भी जांच टीम का हिस्सा थे। ड्रग केस में मजीठिया का नाम सामने आया था, जबकि मजीठिया ने आरोपों से इनकार किया था। इसके करीब तीन सप्ताह बाद जनवरी 2015 में निरंजन सिंह का जालंधर से कोलकाता ट्रांसफर कर दिया गया। उन्हें शारदा चिटफंड से जुड़े काम के लिए भेजा गया था। निरंजन सिंह ने इस ट्रांसफर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी ओर से यह दावा किया गया था कि मजीठिया से पूछताछ के कारण उन्हें जांच से हटाया जा रहा है। मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया गया और उन्हें जालंधर में रहकर ड्रग केस की जांच से जुड़े रहने की अनुमति मिली। इसके बाद भी मामले की जांच आगे चलती रही। 2016 में निरंजन सिंह को असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर पद पर प्रमोट किया गया था।

 

 

2018 में ED छोड़ने का फैसला, 2021 में रिटायरमेंट

निरंजन सिंह ने 2018 में ED से इस्तीफा देने का फैसला किया था। उस समय उनकी सेवानिवृत्ति में करीब तीन साल बाकी थे। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया। बाद में उन्होंने 31 मई 2021 को ED के डिप्टी डायरेक्टर पद से औपचारिक रूप से सेवानिवृत्ति ली। ED से सेवानिवृत्ति के बाद भी निरंजन सिंह पंजाब के ड्रग मामलों और जांच एजेंसियों से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे। हाल के वर्षों में उन्होंने पंजाब में नशे की समस्या और पुराने ड्रग मामलों से जुड़े मुद्दों पर भी बात की है।

निरंजन सिंह के साथ पंजाब पुलिस के पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों ने भी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की सदस्यता ली। सेखों पहले पंजाब पुलिस में DSP रहे हैं और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिए गए थे। सेखों उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस मंत्री भारत भूषण आशू से जुड़े एक मामले की जांच रिपोर्ट तैयार की थी। बाद में दोनों के बीच विवाद बढ़ा और सेखों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई। 2021 में उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। सेखों ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। अब वह औपचारिक रूप से वारिस पंजाब दे में शामिल हो गए हैं। इस तरह पार्टी में एक पूर्व ED अधिकारी और पूर्व पुलिस अधिकारी की एंट्री हुई है, जिनका सार्वजनिक जीवन में पंजाब के नशे और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों से पुराना जुड़ाव रहा है।

 

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