Punjab Roadways Strike 2026 : पंजाब की मान सरकार के खिलाफ पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। अपनी वर्षों पुरानी मांगों और वादाखिलाफी से नाराज कर्मचारियों ने राज्यभर के डिपो गेटों पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन पूर्ण हड़ताल पर जाने की सीधी चेतावनी दे दी है।
इस दौरान कर्मचारी न केवल विधानसभा सत्र का घेराव करेंगे, बल्कि अपनी मांगों को मनवाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकारी आवास के बाहर अनिश्चितकालीन ‘पक्का मोर्चा’ भी लगाएंगे।
पट्टी डिपो पर आयोजित गेट रैली को संबोधित करते हुए यूनियन के डिपो प्रधान वजीर सिंह जोनेके ने सरकार पर तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े दावे कर रही थी, लेकिन अब अपने ही वादों से मुकर चुकी है। जोनेके ने कहा कि नशा माफिया, रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट और केबल माफिया पर शिकंजा कसने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी राज्य में नशे के कारण युवा जान गंवा रहे हैं।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि पंजाब के जागरूक संगठनों द्वारा बुलाए गए ‘पंजाब बंद’ के आह्वान का कर्मचारी पूरी एकजुटता के साथ समर्थन करते हैं।
75 दौर की वार्ता बेनतीजा, 11 साल से पक्के होने का इंतजार
रोडवेज कर्मचारियों का सबसे बड़ा दर्द उनकी सेवाएं नियमित (पक्का) न किया जाना है। यूनियन नेताओं के मुताबिक, अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अब तक 70 से 75 दौर की औपचारिक बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद नतीजतन कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिले हैं, कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
यूनियन के संरक्षक गुरविंदर सिंह गिल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 में एक नया अधिनियम बनाकर आउटसोर्स कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लाने का ढांचा तो तैयार किया, लेकिन इस प्रक्रिया को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा, “सैकड़ों कर्मचारी पिछले 11 वर्षों से तमाम जरूरी शर्तें और प्रक्रियाएं पूरी करने के बावजूद ठेकेदारी प्रथा के तहत काम करने को मजबूर हैं। सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है।”
विधानसभा घेराव और सीएम आवास पर पक्के मोर्चे की तैयारी
यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतनाम सिंह जोनेके ने कहा कि सरकार ने अपने पहले विधानसभा सत्र में यह ढिंढोरा पीटा था कि प्रदेश से ठेकेदारी प्रथा (आउटसोर्सिंग) के जरिए होने वाले शोषण को हमेशा के लिए खत्म किया जाएगा। लेकिन आज वही सरकार कर्मचारियों को अलग-अलग गुटों में बांटकर उनका आर्थिक व मानसिक शोषण कर रही है।
यूनियन ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 21 अक्टूबर से पहले आउटसोर्सिंग कर्मियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लाकर समयबद्ध तरीके से पक्का करने की नीति लागू नहीं की गई, तो पंजाब में सरकारी बसों के पहिए पूरी तरह थम जाएंगे। विधानसभा सत्र के दौरान बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा और मुख्यमंत्री आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा।
इस गेट रैली के दौरान सतनाम सिंह ढिल्लों, नरेंद्र सिंह, बलजीत सिंह गजल, गुरसेवक सिंह, महल सिंह सभरा, लखवीर सिंह, रजवंत सिंह, और दिलबाग सिंह हरिके समेत बड़ी संख्या में यूनियन के पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

