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Rajasthan News: कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल में एक और प्रसूता की मौत, अब तक चार महिलाओं ने गंवाई जान, 8 की हालत गंभीर

VVinita Kohli
Rajasthan News: कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल में एक और प्रसूता की मौत, अब तक चार महिलाओं ने गंवाई जान, 8 की हालत गंभीर
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कोटा: राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज के न्यू हॉस्पिटल में प्रसूताओं की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार रात सीजेरियन डिलीवरी के बाद एक और महिला की मौत हो गई। मृतका पिंकी महावर को गंभीर हालत में जेके लोन हॉस्पिटल से सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में रेफर किया गया था, जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद अब तक दोनों अस्पतालों में चार महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि आठ महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और समय पर रेफर नहीं करने के आरोप लगाए हैं।

सीजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबीयत

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कोटा के श्रीरामनगर निवासी पिंकी महावर को 7 मई को जेके लोन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उसी रात करीब 12 बजे उसकी सीजेरियन डिलीवरी हुई और उसने एक बच्ची को जन्म दिया। अगले दिन से ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार के अनुसार पिंकी का यूरिन आना बंद हो गया था और ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा था। हालत खराब होने पर उसे अस्पताल के ICU में शिफ्ट किया गया, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ। बाद में रविवार रात उसे मेडिकल कॉलेज के न्यू हॉस्पिटल स्थित सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में रेफर किया गया, जहां वेंटिलेटर पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

चार मौतों से बढ़ी चिंता

जेके लोन और न्यू हॉस्पिटल में अब तक चार महिलाओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले बूंदी जिले के सुवांसा गांव की रहने वाली प्रिया महावर की भी 9 मई की रात मौत हुई थी। डॉक्टरों ने प्रारंभिक तौर पर हार्ट फेल्योर को कारण बताया था। वहीं कोटा की आरती चौबदार और सुल्तानपुर क्षेत्र की पिंकी बेरवाल समेत कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार न्यू हॉस्पिटल में भर्ती छह महिलाओं की किडनी फेल होने की स्थिति सामने आई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

मृतका पिंकी महावर के पति चंद्रप्रकाश ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश करता रहा। उनका कहना है कि 8 मई को ही पिंकी की हालत बिगड़ गई थी, लेकिन उसे समय पर हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि जब मरीज की स्थिति बेहद गंभीर हो गई तब आनन-फानन में उसे रेफर किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल प्रशासन ने मरीज को मुख्य गेट के बजाय पिछले दरवाजे से बाहर निकाला ताकि मामला ज्यादा लोगों तक न पहुंचे। परिवार ने दोषियों पर कार्रवाई और मौत के सही कारण सामने आने तक शव लेने से इनकार कर दिया है।

किडनी फेल और संक्रमण की आशंका, जांच की मांग 

अस्पताल में भर्ती कई महिलाओं में एक जैसी समस्याएं सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। मरीजों में यूरिन बंद होना, ब्लड प्रेशर गिरना और किडनी फेल जैसी शिकायतें देखी जा रही हैं। डॉक्टरों की टीमें मरीजों की लगातार निगरानी कर रही हैं। हालांकि अभी तक अस्पताल प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से किसी संक्रमण या दवा से जुड़े कारण की पुष्टि नहीं की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ कई मामलों का सामने आना गंभीर जांच का विषय है।

कोटा में लगातार हो रही प्रसूताओं की मौत के बाद चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी बढ़ रही है। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। इस बीच अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सभी मरीजों का इलाज प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया और पूरे मामले की मेडिकल जांच कराई जा रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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