Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Rajasthan Weather Today: राजस्थान के 11 जिलों में आंधी-तूफान का ऑरेंज अलर्ट, जानें अगले 24 घंटे का हाल

AAmandeep Singh
Rajasthan Weather Today: राजस्थान के 11 जिलों में आंधी-तूफान का ऑरेंज अलर्ट, जानें अगले 24 घंटे का हाल
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

राजस्थान। राजस्थान में जून महीने की शुरुआत के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह पलट गया है। जहां इन दिनों मरुधरा में सूरज की तपिश से पैर जलने लगते थे, वहां अब आसमान से राहत की बौछारें गिर रही हैं। पश्चिमी विक्षोभ की तगड़ी सक्रियता के चलते नागौर जिले में नौतपा के आठवें दिन तड़के अचानक घने बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई। नागौर के कई ग्रामीण इलाकों में बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिसने तपते राजस्थान को अचानक शिमला जैसा अहसास करा दिया। इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने पूरे इलाके में ठंडी हवाओं का दौर शुरू कर दिया है।

अजमेर में बरसे बदरा, खरीफ की बुवाई में जुटे अन्नदाता

विज्ञापन

अजमेर संभाग में भी मौसम की मेहरबानी लगातार तीसरे दिन देखने को मिली। अजमेर शहर और उसके आसपास के कस्बों में रुक-रुक कर कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर लगातार बना हुआ है। पिछले कई हफ्तों से रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और उमस झेल रहे स्थानीय निवासियों, बेजुबान पशुओं और वन्यजीवों को इस बदलाव से बड़ी राहत मिली है। नागौर और अजमेर के देहाती इलाकों में हुई इस बारिश से खेतों में अच्छी-खासी नमी आ गई है। इसे खरीफ की फसल के लिए शुभ संकेत मानते हुए किसान भाई अपने खेतों को दुरुस्त करने और बुवाई की अग्रिम तैयारियों में मुस्तैदी से जुट गए हैं।

जयपुर से कोटा तक 11 जिलों में आंधी-तूफान का ‘ऑरेंज अलर्ट’

भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने राज्य के बड़े हिस्से में मौसम के और उग्र होने की आशंका जताई है। मौसम विभाग ने एक विशेष बुलेटिन जारी कर सूबे के 11 प्रमुख जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इसके तहत राजधानी जयपुर, अजमेर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में दोपहर के बाद मौसम गंभीर रूप अख्तियार कर सकता है। इन इलाकों में बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली गिरने की आशंका के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी झोंकेदार हवाएं और धूलभरी आंधी चलने का अनुमान लगाया गया है।

पश्चिमी राजस्थान के रेतीले धोरों में उड़ेगी धूल, तापमान 44 डिग्री से नीचे

राहत और आंधी का यह सिलसिला सिर्फ पूर्वी हिस्से तक सीमित नहीं है। पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग में भी बादलों की आवाजाही बनी हुई है। जैसलमेर, फलोदी और बाड़मेर जैसी सबसे गर्म बेल्ट में तेज धूलभरी आंधी चलने की आशंका है, जिससे सड़कों पर दृश्यता (विजिबिलिटी) काफी कम हो सकती है। हालांकि, इस पूरे अंधड़ और बारिश का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान जो कभी 48 डिग्री के पास था, वह अब 44 डिग्री सेल्सियस के नीचे आ गया है और हीटवेव जैसी स्थिति से फिलहाल पूरी तरह निजात मिल गई है।

प्रशासन मुस्तैद, आम जनता और किसानों को विशेष हिदायत

मौसम की इस तल्खी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग ने आम लोगों से खास सतर्कता बरतने की अपील की है। वज्रपात और तेज आंधी के दौरान लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों, कच्चे मकानों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने की सख्त हिदायत दी गई है। साथ ही, सड़कों पर चलने वाले वाहन चालकों को आंधी के समय गाड़ी सुरक्षित किनारे लगाने को कहा गया है। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को आगाह किया है कि वे ओलावृष्टि से अपनी फसलों का बचाव करें और मंडियों या खुले आसमान के नीचे रखे कटी फसल के ढेरों को तिरपाल से ढककर रखें ताकि अनाज बर्बाद होने से बच सके।

विज्ञापन

राजस्थान की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।