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Rajasthan Weather Update: 12 जिलों में भयंकर आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट, एक्टिव हुआ नया वेदर सिस्टम

AAmandeep Singh
Rajasthan Weather Update:  12 जिलों में भयंकर आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट, एक्टिव हुआ नया वेदर सिस्टम
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राजस्थान। मरुधरा में नौतपा के तीखे तेवरों के बीच कुदरत ने करवट ली है, जिससे झुलस रहे लोगों को थोड़ी राहत नसीब हुई है। पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर की तरफ से आए एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) ने राजस्थान के मौसम का पूरा ढर्रा पलट दिया है। शुक्रवार सुबह से ही धौलपुर के बाड़ी समेत आस-पास के इलाकों में घने बादलों की आवाजाही के साथ रुक-रुक कर बारिश का दौर शुरू हो गया। इससे पहले गुरुवार देर रात शेखावाटी के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ में चने के आकार के बड़े-बड़े ओले गिरे। हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और अलवर के कुछ हिस्सों में भी आंधी-पानी के कारण पारे में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है।

आज 12 जिलों में 70 किमी की रफ्तार से चलेगा अंधड़

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मौसम केंद्र जयपुर के मुताबिक, यह नया सिस्टम राजस्थान में 1 जून तक पूरी तरह सक्रिय रहेगा। विभाग ने आज विशेषकर उत्तर-पूर्वी और सीमावर्ती 12 जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इन इलाकों में दिन के समय 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी धूल भरी आंधी चलने की आशंका है। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस अंधड़ और बारिश के कारण पिछले दो हफ्तों से चौबीसों घंटे चल रही थपेड़ेदार लू (हीटवेव) का असर काफी हद तक कम हो जाएगा।

जयपुर में टूटा 9 साल का रिकॉर्ड, श्रीगंगानगर 47.1 डिग्री पर तपा

इस मौसमी राहत से ठीक पहले राजस्थान के कई शहरों ने गर्मी के पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। राजधानी जयपुर में गुरुवार को इस सीजन का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां पारा 45.4 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। बीते 9 साल के इतिहास में यह दूसरी बार है जब जयपुर में नौतपा के दौरान तापमान इस स्तर पर पहुंचा है; इससे पहले साल 2018 में ऐसा हुआ था। वहीं, पिछले 24 घंटों में श्रीगंगानगर 47.1 डिग्री सेल्सियस के साथ पूरे सूबे में सबसे गर्म रहा। इसके अलावा चूरू में 46.5, फलोदी और जैसलमेर में 46 डिग्री पारा रहने से दोपहर में सड़कें पूरी तरह सूनी नजर आईं।

आईआईटी बॉम्बे का डरावना खुलासा: कंक्रीट के जंगल बन रहे ‘हीट आइलैंड’

मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे की एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। आईआईटी के विशेषज्ञों ने साल 2017 से 2024 के बीच उदयपुर और राजस्थान के अन्य प्रमुख शहरों का गहन अध्ययन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहरों में तेजी से घटते पेड़-पौधों (ग्रीन जोन) की वजह से ‘अर्बन हीट आइलैंड’ का दायरा खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। यह वो डरावनी स्थिति है जब कंक्रीट के मकानों और डामर की सड़कों के कारण शहर का तापमान अपने आस-पास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में कई डिग्री ज्यादा गर्म हो जाता है।

मौतों का बढ़ता आंकड़ा और बेजुबान जानवरों पर संकट

आईआईटी की इस रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात गर्मी के कारण होने वाली मौतों को लेकर कही गई है। सरकारी आंकड़ों में भले ही हीटस्ट्रोक से मरने वालों की संख्या महज 5 से 6 बताई जाती है, लेकिन जमीनी रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आंकड़ा हर साल 15 से अधिक हो रहा है। बढ़ते पारे का यह जानलेवा असर इंसानों के साथ-साथ घरों में पाले जाने वाले पालतू जानवरों (पेट्स) पर भी दिख रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, 45 डिग्री से ऊपर तापमान जाने पर कुत्तों और बिल्लियों में ‘हीट स्ट्रेस’ और ‘हीट स्ट्रोक’ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे उनके व्यवहार में आक्रामकता और अंगों के फेल होने की नौबत आ रही है।

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