सोनीपत। हरियाणा में गैंगस्टरों और शूटरों के सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए सोनीपत पुलिस ने अपनी रणनीति आक्रामक कर दी है। एंटी गैंगस्टर यूनिट ने पिछले 9 घंटों के भीतर अपनी धुआंधार कार्रवाई से अपराध जगत में खलबली मचा दी है। दो अलग-अलग मुठभेड़ों में पांच बदमाशों के पैरों में गोली मारकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है। ताजा मामला मुरथल थाना क्षेत्र के रेवली गांव का है, जहां बीते 16 मई को खरखौदा कोर्ट परिसर के ठीक बाहर गैंगस्टर नीरज उर्फ कातिया की सरेआम खोपड़ी उड़ाने वाले तीन शार्प शूटरों को पुलिस ने एक संक्षिप्त लेकिन तीखे एनकाउंटर के बाद दबोच लिया।
रेवली गांव के पास छिपे थे शूटर, सरेंडर की चेतावनी पर खोल दिया फायर
पुलिस महकमे को खुफिया इनपुट मिला था कि खरखौदा हत्याकांड को अंजाम देकर दिल्ली-एनसीआर में लुक-छिप रहे झज्जर के दुबलधन गांव के तीन शूटर— नवनीत उर्फ साहिल, सोहन उर्फ काकू, और साहिल उर्फ बाउ, किसी अन्य बड़ी वारदात की फिराक में मुरथल के पास इकट्ठा हुए हैं। सूचना पुख्ता होते ही एंटी गैंगस्टर यूनिट (AGU) ने जाल बिछाया और रेवली गांव के नजदीक घेराबंदी शुरू की। खुद को चारों तरफ से घिरा देख बदमाशों ने पुलिस की ‘सरेंडर’ करने की चेतावनी को अनसुना कर दिया और अत्याधुनिक हथियारों से सीधे पुलिस पार्टी पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। पुलिस ने भी जवाबी मोर्चा संभाला, जिसमें तीनों बदमाशों के पैरों में गोलियां लगीं और वे वहीं ढेर हो गए। फिलहाल तीनों का इलाज कड़े पुलिस पहरे के बीच सिविल अस्पताल में चल रहा है।
15 साल पुरानी रंजिश: चाचा की हत्या का बदला लेने के लिए रची गई थी कोर्ट के बाहर साजिश
इस हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर के बाद जो थ्योरी सामने आई है, उसने इस पूरे मामले को विशुद्ध रूप से एक पुरानी और खूनी रंजिश का नतीजा बताया है।
वारदात का बैकग्राउंड:
दरअसल, 16 मई को नीरज उर्फ कातिया अपनी पत्नी के साथ एक घरेलू मामले (दहेज केस) की तारीख के सिलसिले में खरखौदा कोर्ट आया हुआ था। दोपहर सवा 12 बजे जैसे ही वह कोर्ट से बाहर निकलकर बस स्टैंड की तरफ बढ़ा, एक सफेद ब्रेजा कार ने उसे पीछे से जोरदार टक्कर मारी। नीरज के जमीन पर गिरते ही कार से उतरे इन तीनों युवकों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि साल 2009 में मृतक नीरज उर्फ कातिया ने मुख्य आरोपी नवनीत उर्फ साहिल के सगे चाचा की बेरहमी से हत्या कर दी थी। तभी से नवनीत के मन में बदले की आग सुलग रही थी। ठीक 15 साल बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस खूनी खेल का हिसाब चुकता किया।
इन जांबाज पुलिसकर्मियों ने संभाला मोर्चा
इस पूरी कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सोनीपत पुलिस की दो अलग-अलग टीमों ने रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया। पहली टीम में पीएसआई विवेक, एएसआई विक्रांत, सब इंस्पेक्टर मनजीत, हेड कांस्टेबल प्रदीप और एएसआई अमित ने मोर्चा संभाला। वहीं, दूसरी एएनसी (एंटी नारकोटिक्स/गैंगस्टर) टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर सतेंद्र, पीएसआई जितेंद्र, सब इंस्पेक्टर सुरेश, एएसआई आशीष, एचसी अमित और कांस्टेबल नवीन व संदीप ने किया, जिनकी सटीक रणनीतिक घेराबंदी के चलते बदमाश भागने में नाकाम रहे। इस केस में दो आरोपी पहले ही दबोचे जा चुके हैं और अब इन तीनों के पकड़े जाने के बाद पूरी वारदात का पटाक्षेप हो गया है।

