Haryana Girls Hockey: सोनीपत की 4 बेटियों ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, भारत को 44 साल बाद मिला गोल्ड
सोनीपत की 4 बेटियों ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, भारत को 44 साल बाद मिला गोल्ड
Haryana Girls Hockey: एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम द्वारा 44 साल बाद ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने की गूंज पूरे देश में है, लेकिन हरियाणा का सोनीपत जिला इस वक्त गर्व से सराबोर है।
भारतीय टीम की इस स्वर्णिम सफलता में सोनीपत की चार होनहार बेटियों—ज्योति रुमावत, नेहा गोयल, साक्षी राणा और शिल्पी डबास ने अहम भूमिका निभाई है। इन चारों खिलाड़ियों में शामिल ज्योति रुमावत का फर्श से अर्श तक पहुंचने का सफर किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है। जिस बेटी के पास कभी हॉकी किट, जूते और ट्रेनिंग की फीस भरने तक के पैसे नहीं थे, आज उसी ने एशियन गेम्स में तिरंगा लहराकर पूरे देश का मस्तक ऊंचा कर दिया है।
ज्योति जब महज छठी कक्षा में थीं, तब उनके पिता का साया सिर से उठ गया था। पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। ऐसे कठिन दौर में भी ज्योति का रुझान हॉकी की तरफ बना रहा। परिस्थितियों से हार मानने के बजाय ज्योति की मां ने हिम्मत जुटाई और दूसरों के घरों में बर्तन-चौका व झाड़ू-पोछा करके बेटी के सपने को मरने नहीं दिया। मां ने खुद ढेरों तकलीफें सही, लेकिन बेटी के हाथों से हॉकी स्टिक छूटने नहीं दी।
‘इस बार कुछ बहुत बड़ा करूंगी’— भाई से किया वादा निभाया, दादी की आंखों में झलके खुशी के आंसू
सोनीपत स्थित ज्योति के घर में इस समय दीवाली जैसा माहौल है। अपनी पोती के गले में चमचमाता गोल्ड मेडल देखकर बुजुर्ग दादी की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने गद्गद होकर बताया कि यह सिर्फ एक खेल की जीत नहीं है, बल्कि उन कठिन और तंगहाली भरे दिनों का जवाब है, जिन्हें परिवार ने सालों तक चुपचाप सहा है। ज्योति ने बचपन से ही अपने खेल को अपना जुनून बनाए रखा और कभी संसाधनों की कमी की शिकायत नहीं की।
चीन के हांगझू में आयोजित एशियन गेम्स के लिए रवाना होने से ठीक पहले ज्योति ने अपने भाई प्रवीण से एक वादा किया था। उन्होंने भाई का हाथ थामकर कहा था, “इस बार कुछ बहुत बड़ा करने जा रही हूं।” अब जब भारतीय महिला टीम ने चीन को हराकर 44 साल बाद गोल्ड जीता, तो बहन ने अपना कहा सच कर दिखाया। भाई प्रवीण का कहना है कि बहन की इस उपलब्धि ने परिवार के सालों के दर्द और संघर्ष को एक पल में भुला दिया है।
संसाधनों की कमी को जुनून से हराया, युवा खिलाड़ियों के लिए बनीं मिसाल
हॉकी के मैदान पर ज्योति रुमावत का प्रदर्शन इस बात की मिसाल है कि अगर इरादे मजबूत हों तो गरीबी और कठिन परिस्थितियां कभी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं। एक समय ऐसा भी था जब ज्योति के पास प्रैक्टिस पर जाने के लिए स्पोर्ट्स शूज़ तक नहीं होते थे और फीस देने के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो जाता था।
आज वही ज्योति अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्वर्ण पदक विजेता टीम का प्रमुख चेहरा बन चुकी हैं। सोनीपत के खेल प्रेमियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि ज्योति, नेहा, साक्षी और शिल्पी जैसी बेटियों ने साबित कर दिया है कि हरियाणा की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। इन बेटियों की इस ऐतिहासिक कामयाबी से प्रदेश की हजारों अन्य युवा खिलाड़ियों को भी नया हौसला और प्रेरणा मिलेगी।
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