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India First Hydrogen Train Trial: गैस नहीं बना पाया करोड़ों का प्लांट, सोनीपत में हाइड्रोजन ट्रेन के प्रोजेक्ट पर मंडराए संकट के बादल

AAmandeep Singh
गैस नहीं बना पाया करोड़ों का प्लांट, सोनीपत में हाइड्रोजन ट्रेन के प्रोजेक्ट पर मंडराए संकट के बादल
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सोनीपत। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने की तैयारी कर रहे सोनीपत-जींद रेल मार्ग पर फिलहाल सन्नाटा पसरा है। जिस ट्रैक पर देश की पहली प्रदूषण मुक्त हाइड्रोजन ट्रेन दौड़नी थी, वहां अब तकनीकी खामियों का अंबार खड़ा हो गया है। सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास करोड़ों की लागत से तैयार किए गए देश के पहले हाइड्रोजन फ्यूल प्लांट ने परीक्षण के दौरान सही परिणाम नहीं दिए। गैस उत्पादन प्रक्रिया ठप होने से न केवल ट्रायल प्रभावित हुआ है, बल्कि इस पूरे प्रोजेक्ट की समय-सीमा (Deadline) पर भी सवालिया निशान लग गए हैं।

इलेक्ट्रोलाइज़र और प्रेशर ने बिगाड़ा खेल: क्या है तकनीकी पेंच?

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रेलवे के तकनीकी जानकारों के अनुसार, समस्या की जड़ प्लांट के ‘इलेक्ट्रोलाइज़र’ में छिपी है। दरअसल, हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन को चलाने के लिए अत्यंत शुद्ध और उच्च दबाव वाली गैस की आवश्यकता होती है। शुरुआती जांच में पाया गया कि प्लांट पानी से हाइड्रोजन को अलग तो कर रहा है, लेकिन उसे जरूरी ‘प्रेशर’ के साथ स्टोर करने में नाकाम साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक गैस की शुद्धता और दबाव मानक स्तर पर नहीं पहुंचता, तब तक ट्रेन के संवेदनशील इंजनों को चालू करना जोखिम भरा हो सकता है।

प्रदूषण मुक्त सफर का था लक्ष्य, अब बढ़ेगा इंतजार

सोनीपत से जींद के बीच का 89 किलोमीटर लंबा यह रूट भारतीय रेलवे के ‘ग्रीन मिशन’ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। रेलवे का लक्ष्य इस रूट पर डीजल इंजनों को पूरी तरह हटाकर शून्य उत्सर्जन वाली ट्रेनें चलाना है। इस ऐतिहासिक कदम के लिए सोनीपत को बेस बनाया गया था, लेकिन फ्यूल प्लांट में आई इस ‘इमरजेंसी’ ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। अब जब तक गैस की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ट्रेन को पटरी पर उतारना मुमकिन नहीं दिख रहा है।

विशेषज्ञों की टीम करेगी ‘सर्जरी’, रेलवे अलर्ट मोड पर

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को मौके पर बुलाया है। विभाग का कहना है कि प्लांट की कमियों को बारीकी से परखा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, “यह एक नई और जटिल तकनीक है, जिसमें शुरुआती चुनौतियां आना स्वाभाविक है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।” फिलहाल, सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास स्थित इस प्लांट में युद्धस्तर पर सुधार कार्य जारी है, ताकि जल्द से जल्द हाइड्रोजन की ‘पावर’ से ट्रेन को रफ्तार दी जा सके।

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