September 29, 2026

कांगड़ा के दिग्गज नेता विजय सिंह मनकोटिया का निधन, सेना से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

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कांगड़ा के दिग्गज नेता विजय सिंह मनकोटिया का निधन, सेना से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

विजय सिंह मनकोटिया का फाइल फोटो

Vijay Mankotia Death: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की शाहपुर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह निधन हो गया। सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें कांगड़ा के सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। मनकोटिया के निधन की खबर सामने आने के बाद कांगड़ा समेत पूरे हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से शोक संवेदनाएं सामने आईं। उनका पार्थिव शरीर अस्पताल से उनके पैतृक गांव तियारा ले जाया गया। उनके बच्चे विदेश में रहते हैं और उनके लौटने के बाद अंतिम संस्कार की तारीख तय किए जाने की जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी पूर्व मंत्री के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने शाहपुर और कांगड़ा क्षेत्र के विकास में मनकोटिया के योगदान को याद करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताई।

1982 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर, पांच बार विधानसभा पहुंचे

मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना में अधिकारी के तौर पर सेवाएं दी थीं। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और शाहपुर विधानसभा क्षेत्र को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। सेना में उनकी सेवाओं और बाद के सार्वजनिक जीवन के योगदान के लिए उन्हें 2024 में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ वेटरन अचीवर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। मनकोटिया ने 1982 में पहली बार शाहपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 1985 में कांग्रेस, 1990 में जनता दल, 1993 में कांग्रेस और 2003 में कांग्रेस के टिकट पर शाहपुर से जीत दर्ज की। इस तरह वह पांच बार विधानसभा के सदस्य रहे। उनका राजनीतिक सफर किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस और जनता दल के साथ रहने के अलावा उन्होंने अलग-अलग समय पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा। हिमाचल की राजनीति में उनकी पहचान खुलकर अपनी बात रखने वाले नेता के रूप में बनी।

 

 

दो बार सरकार में मंत्री रहे

विजय सिंह मनकोटिया ने हिमाचल प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उपलब्ध राजनीतिक रिकॉर्ड के अनुसार 1993 में उन्हें वीरभद्र सिंह सरकार में पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी मिली थी। 2003 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उन्हें एक बार फिर मंत्री बनाया गया। पर्यटन क्षेत्र से उनका जुड़ाव लंबे समय तक रहा। वह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम से भी जुड़े रहे और पूर्व सैनिकों के संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। हिमाचल प्रदेश एक्स-सर्विसमैन लीग के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने काम किया था। राजनीति के अलावा मनकोटिया लेखन में भी सक्रिय रहे। उन्होंने ‘The Patterns of Destiny’, ‘Turmoil’ और ‘Upheaval’ नाम से किताबें लिखीं, जिनमें उन्होंने अपने विचार और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को सामने रखा।

मनकोटिया और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय तक चर्चा में रहे। कांग्रेस में रहते हुए भी मनकोटिया कई मुद्दों पर वीरभद्र सिंह की कार्यशैली और सरकार की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते रहे थे। 1990 में वह कांग्रेस से अलग होकर जनता दल के साथ गए और शाहपुर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 1993 में कांग्रेस में वापसी के बाद वह फिर शाहपुर से विधायक बने और वीरभद्र सिंह सरकार में मंत्री बने। बाद के वर्षों में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी फिर बढ़ी। मनकोटिया की पहचान ऐसे नेता की रही, जो कई बार अपनी ही पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ भी सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते थे। उनके राजनीतिक बयानों और वीरभद्र सिंह के साथ मतभेदों ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा में बनाए रखा।

 

 

2007 के बाद चुनावी राजनीति में नहीं मिली वापसी

2003 में शाहपुर से पांचवीं बार विधायक बनने के बाद मनकोटिया की चुनावी राजनीति में वापसी नहीं हो सकी। 2007 के बाद उन्होंने 2012 में कांग्रेस के टिकट पर शाहपुर से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा की सरवीण चौधरी से हार गए। 2017 में उन्होंने शाहपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भी सरवीण चौधरी ने जीत दर्ज की, जबकि मनकोटिया दूसरे स्थान पर रहे। इसके बावजूद कांगड़ा और शाहपुर की राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रही। अक्टूबर 2022 में मनकोटिया भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा में शामिल होने के समय भी उनकी पहचान हिमाचल की राजनीति के ऐसे वरिष्ठ नेता के रूप में रही, जिनका अलग-अलग राजनीतिक दलों में लंबा अनुभव था।

मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर कांगड़ा से विधायक पवन काजल ने शोक जताया। उन्होंने मनकोटिया के निधन को क्षेत्र के लिए क्षति बताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। मनकोटिया का कांगड़ा की राजनीति में लंबा प्रभाव रहा। शाहपुर से पांच बार विधायक बनने के साथ उन्होंने मंत्री के तौर पर भी काम किया और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे। मेजर विजय सिंह मनकोटिया अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। उनका बेटा अमेरिका में रहता है, जबकि बेटी भी विदेश में रहती है। परिवार के सदस्यों के विदेश से लौटने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया तय की जाएगी। उनके निधन से उनके पैतृक गांव तियारा और शाहपुर क्षेत्र में भी शोक का माहौल है।

 

 

CM सुक्खू ने कहा- शाहपुर के विकास में योगदान याद रहेगा

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मनकोटिया ने हिमाचल प्रदेश के विकास के साथ-साथ कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास और जनकल्याण के लिए काम किया। मुख्यमंत्री ने उनके सार्वजनिक जीवन और लोगों की सेवा में किए गए कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की। मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक जीवन हिमाचल की बदलती राजनीति का एक लंबा अध्याय रहा। सेना में सेवा से लेकर पांच बार विधायक बनने, दो बार मंत्री रहने और अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ काम करने तक उनका सफर चार दशक से ज्यादा समय तक प्रदेश की राजनीति से जुड़ा रहा।

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