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Vinesh Phogat : 'मैं फिर वापस आऊंगी', एशियाई खेल ट्रायल्स में हार के बाद विनेश फोगाट का बड़ा बयान

AAmandeep Singh
Vinesh Phogat : 'मैं फिर वापस आऊंगी', एशियाई खेल ट्रायल्स में हार के बाद विनेश फोगाट का बड़ा बयान
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हरियाणा। भारतीय कुश्ती की सबसे जुझारू चेहरों में से एक और हरियाणा की जुलाना सीट से कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एशियाई खेल चयन ट्रायल्स के सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें युवा पहलवान मीनाक्षी गोयत के हाथों 4-6 से करीबी हार का सामना करना पड़ा। इस अप्रत्याशित हार के बाद विनेश मैट पर ही बेहद भावुक नजर आईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। लेकिन, अखाड़े की इस शेरनी ने अपनी हार को अंत मानने से साफ इनकार कर दिया। मुकाबले के बाद विनेश ने भरे मन से मगर बुलंद आवाज में कहा, “मैं फिर वापस आऊंगी।” उनके इस एक वाक्य ने सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में संदेशों की बाढ़ ला दी है।

दो साल बाद मैट पर वापसी और मातृत्व की दोहरी चुनौती

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विनेश फोगाट के इस संघर्ष को करीब से देखने वाले लोग जानते हैं कि उनके लिए इस मुकाम तक पहुंचना ही किसी चमत्कार से कम नहीं था। रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने विनेश का मैट पर रोते हुए वीडियो साझा करते हुए एक बेहद भावुक नोट लिखा। दीपेंद्र ने कहा कि पिछले दो वर्षों से प्रतिस्पर्धी कुश्ती से पूरी तरह दूर रहने, हाल ही में मां बनने के सुखद अहसास से गुजरने और व्यवस्था से लगातार लोहा लेने के बाद भी इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर सीधे मैट पर उतरना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने भरोसा जताया कि विनेश फोगाट ने खेल के मैदान के भीतर और बाहर जो असाधारण साहस दिखाया है, उसी के दम पर वह बहुत जल्द और अधिक मजबूती के साथ अखाड़े में वापसी करेंगी।

‘मैं असफल नहीं हुई, व्यवस्था से लड़ रही थी’

ट्रायल्स के नतीजे भले ही विनेश के पक्ष में न रहे हों, लेकिन खेल प्रेमियों की नजर में उन्होंने एक बार फिर देश का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया के लोकप्रिय हैंडल ‘जनतागिरी’ सहित हजारों यूजर्स ने लिखा कि विनेश की यह हार किसी आम खिलाड़ी की हार जैसी नहीं है। विनेश ने पहले तानाशाही व्यवस्था और अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर अदालत तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और फिर बिना किसी तैयारी के सीधे मैट पर उतरकर यह साबित कर दिया कि वह आसानी से घुटने टेकने वाली खिलाड़ी नहीं हैं। खुद विनेश ने भी मैच के बाद कहा कि वह किसी मुकाबले में असफल नहीं हुई हैं, बल्कि वह उस पूरी व्यवस्था से लड़ रही थीं जिसने उन्हें रोकने की हर संभव कोशिश की।

करोड़ों युवाओं के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की नई मिसाल

यही वजह है कि खेल के गलियारों से लेकर इंटरनेट की दुनिया तक, आज विनेश की इस हार से ज्यादा उनके उस हौसले की चर्चा हो रही है जिसने उन्हें इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी मैट पर खड़ा रखा। लोग उनके इस जुझारूपन को सलाम कर रहे हैं और उन्हें देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बता रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि मेडल तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन विनेश फोगाट ने भारतीय खेलों के इतिहास में रीढ़ की हड्डी बनकर खड़े रहने का जो हुनर सिखाया है, वह उन्हें हमेशा एक चैंपियन के रूप में जिंदा रखेगा।

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