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Wi-Fi No Internet: वाई-फाई सिग्नल फुल होने पर भी क्यों तड़पाता है इंटरनेट? जानें इन 5 छिपे हुए तकनीकी कारणों को

AAmandeep Singh
Wi-Fi  No Internet: वाई-फाई सिग्नल फुल होने पर भी क्यों तड़पाता है इंटरनेट? जानें इन 5 छिपे हुए तकनीकी कारणों को
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टेक्नोलॉजी। आज की डिजिटल दुनिया में रोटी, कपड़ा और मकान के बाद अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होती है, तो वो है एक स्थिर और तेज इंटरनेट कनेक्शन। वर्क फ्रॉम होम हो, बच्चों की ऑनलाइन क्लास या फिर वीकेंड पर ओटीटी (OTT) पर पसंदीदा फिल्म देखनी हो—वाई-फाई हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन अक्सर एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ता है; स्क्रीन के कोने में वाई-फाई के नेटवर्क बार तो पूरे ऊंचे दिखते हैं, मगर ब्राउज़र पर ‘नो इंटरनेट’ या गोल-गोल घूमता हुआ बफरिंग का पहिया नजर आने लगता है। अमूमन लोग इसके लिए तुरंत इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को कोसने लगते हैं, जबकि हकीकत यह है कि खराबी आपके घर के भीतर ही मौजूद कुछ छोटी-छोटी तकनीकी बारीकियों में छिपी हो सकती है।

दीवारों का पहरा और राउटर की गलत ‘लोकेशन’

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वाई-फाई की परफॉर्मेंस काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपने राउटर को घर के किस कोने में जगह दी है। यदि राउटर ड्राइंग रूम में है और आप कंक्रीट की तीन मोटी दीवारें पार करके बेडरूम में बैठे हैं, तो आपके डिवाइस तक पहुंचने वाली तरंगें (Waves) दम तोड़ चुकी होती हैं। दूरी बढ़ने के साथ ही डेटा ट्रांसफर करने की क्षमता घटने लगती है। इसके अलावा, राउटर के बाहरी एंटीना का ढीला होना या गलत दिशा में मुड़ा होना भी सिग्नल की रीच को प्रभावित करता है। बेहतरीन कवरेज के लिए राउटर को हमेशा घर के केंद्र में, किसी खुली और ऊंचाई वाली जगह पर रखना चाहिए।

माइक्रोवेव और कॉर्डलेस फोन: आपके वाई-फाई के गुप्त दुश्मनबहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि उनके किचन में रखा माइक्रोवेव ओवन या घर का पुराना कॉर्डलेस फोन इंटरनेट की रफ़्तार का दुश्मन हो सकता है। दरअसल, अधिकांश पुराने और सामान्य राउटर 2.4 GHके फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करते हैं। इत्तेफाक से घरेलू माइक्रोवेव और कई वायरलेस गैजेट्स भी इसी फ्रीक्वेंसी तरंगों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में जब ये उपकरण ऑन होते हैं, तो वाई-फाई के सिग्नलों के बीच एक अदृश्य टकराव (Interference) पैदा होता है, जिससे स्पीड अचानक धड़ाम से नीचे गिर जाती है।

एक अनार सौ बीमार; बैंडविड्थ के बंटवारे का गणित

आजकल हर घर में केवल एक स्मार्टफोन नहीं होता। एक ही वाई-फाई से पिता का लैपटॉप, मां का मोबाइल, बच्चे का टैबलेट और साथ में बैकग्राउंड में चल रहा स्मार्ट टीवी—सब एक साथ जुड़े होते हैं। ऐसे में आपकी कुल इंटरनेट स्पीड (बैंडविड्थ) इन सभी डिवाइसेज में बराबर या उनके इस्तेमाल के अनुसार बंट जाती है। अगर कोई एक डिवाइस बड़ी फाइल डाउनलोड कर रहा है या हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीम कर रहा है, तो बाकी डिवाइसेज के लिए सिग्नल तो फुल दिखेगा, लेकिन स्पीड के नाम पर सिर्फ इंतजार ही हाथ लगेगा।

जब सिग्नल धोखा दे जाए: सर्वर और सेटिंग्स की गड़बड़ी

अगर आपके फोन में वाई-फाई का आइकन पूरी तरह भरा हुआ है और फिर भी कुछ नहीं चल रहा, तो इसका एक तकनीकी कारण ‘DNS’ या राउटर की सेटिंग्स में गड़बड़ी भी हो सकता है। कई बार राउटर और आपके मोबाइल का संपर्क तो मजबूत होता है (इसलिए सिग्नल फुल दिखता है), लेकिन राउटर का आगे मुख्य इंटरनेट लाइन या कंपनी के सर्वर से संपर्क टूट जाता है। ऐसी स्थिति में सबसे अचूक और देसी नुस्खा यह है कि राउटर को कम से कम 30 सेकंड के लिए बंद करें और फिर चालू (रीस्टार्ट) करें। यह प्रक्रिया राउटर के कैशे मैमोरी को साफ कर उसे नए सिरे से नेटवर्क स्थापित करने में मदद करती है।

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