मजीठिया से आज होनी थी पूछताछ, SIT के सामने नहीं पहुंचे; 2021 में दर्ज हुई थी FIR
बिक्रम मजीठिया SIT के सामने नहीं हुए पेश
Bikram Majithia drugs case: शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया सोमवार को ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए SIT के सामने पेश नहीं होंगे। मजीठिया को 5 अक्टूबर को पेश होने के लिए समन जारी किया गया था, लेकिन उनकी जगह उनके वकील SIT के समक्ष पहुंचे हैं। यह मामला करीब 6 हजार करोड़ रुपए के ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ा बताया जाता है और इसी केस की जांच के तहत SIT पुराने बयानों, कथित वित्तीय लेन-देन और ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ी कड़ियों की पड़ताल कर रही है। इसी मामले में बर्खास्त DSP जगदीश सिंह भोला को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक SIT मजीठिया और भोला से जुड़े पहलुओं को आमने-सामने रखकर जांच आगे बढ़ा सकती है। हालांकि, मजीठिया के आज खुद SIT के सामने पेश नहीं होने के कारण अब पूछताछ किस तरह आगे बढ़ती है, यह जांच टीम के अगले कदम पर निर्भर करेगा।
SIT की जांच केवल पुराने बयानों तक सीमित नहीं है। ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और मामले में सामने आई अलग-अलग कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। जगदीश सिंह भोला का नाम पहले से ही ड्रग रैकेट की जांच से जुड़ा रहा है और अब उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। मामले में जांच एजेंसी पुराने रिकॉर्ड और पहले दर्ज किए गए बयानों को भी देख रही है। जांच के दौरान जिन लोगों के नाम और बयान सामने आए हैं, उनके आधार पर मजीठिया की कथित भूमिका से जुड़े पहलुओं की जांच की गई है। हालांकि, मजीठिया इस मामले में लगाए गए आरोपों पर पहले से सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि यह NDPS एक्ट का मामला है, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई ड्रग्स बरामद नहीं की है। उनका यह भी कहना रहा है कि नशा तस्करी के मामलों में पकड़े गए कई लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
2021 में NDPS एक्ट के तहत दर्ज हुई थी FIR
बिक्रम मजीठिया के खिलाफ पंजाब पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 20 दिसंबर 2021 को FIR दर्ज की थी। FIR में NDPS एक्ट की धारा 25, 27-A और 29 लगाई गई थीं। पुलिस के मुताबिक इस केस का आधार 2018 की STF रिपोर्ट थी। पुलिस का आरोप था कि मजीठिया के कुछ ऐसे लोगों से संबंध थे, जिन पर ड्रग तस्करी से जुड़े होने के आरोप थे। FIR में जांच के लिए गतिविधियों की अवधि 2004 से 2014 तक बताई गई थी। इस केस में बर्खास्त DSP जगदीश सिंह भोला के अलावा जगजीत सिंह चहल, मनिंदर सिंह औलख उर्फ बिट्टू औलख और अन्य लोगों के बयानों का भी उल्लेख किया गया। पंजाब सरकार की ओर से अदालत में कहा गया था कि इन बयानों और अन्य सामग्री के आधार पर मजीठिया की भूमिका की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों ने मामले में पहले सामने आए बयानों और अन्य सामग्री के आधार पर मजीठिया की कथित भूमिका की पड़ताल की। इसी क्रम में अब SIT पुराने रिकॉर्ड और ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। मामले की जांच के दौरान अलग-अलग आरोपियों और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण रहे हैं। इन्हीं बयानों में सामने आए तथ्यों के आधार पर जांच एजेंसी ने मजीठिया से पूछताछ की दिशा तय की है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। मजीठिया लगातार इस मामले को लेकर अपना पक्ष रखते रहे हैं। उनका मुख्य तर्क है कि उनके खिलाफ NDPS केस में कोई ड्रग्स बरामद नहीं हुई। दूसरी तरफ पुलिस और जांच एजेंसियां मामले में दर्ज बयानों और अन्य सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ाती रही हैं।
2022 में मिली थी जमानत, कानूनी लड़ाई जारी रही
FIR दर्ज होने के बाद मजीठिया ने इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ी। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अमृतसर से चुनाव भी लड़ा। इसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा और अगस्त 2022 में उन्हें जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ और जांच की प्रक्रिया आगे चलती रही। अब SIT ने उन्हें 5 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाया था। मजीठिया खुद SIT के सामने नहीं पहुंचे और उनकी ओर से वकील पहुंचे हैं।
इस बीच जांच टीम की नजर उन पुराने बयानों और रिकॉर्ड पर है, जिनका उल्लेख मजीठिया के खिलाफ दर्ज FIR और अदालत में हुई कार्यवाही में किया गया था। SIT कथित वित्तीय लेन-देन और ड्रग नेटवर्क की कड़ियों की भी पड़ताल कर रही है। फिलहाल इस मामले में मजीठिया की ओर से यह कहा जाता रहा है कि पुलिस ने उनके खिलाफ कोई ड्रग्स बरामद नहीं की है। दूसरी तरफ जांच एजेंसियां दर्ज बयानों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर अपनी जांच कर रही हैं। SIT की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि आज वकीलों के पहुंचने के बाद पूछताछ और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
