CEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया
CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन से SC का इनकार
Sir Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। मामला चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया से जुड़े करीब 14 फैसलों को लेकर है, जिनके बारे में याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि इन्हें अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिया गया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत पहले चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित रिकॉर्ड देखना चाहती है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। बेंच में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान सबसे अहम मुद्दों में SIR के लिए बदले गए Form-6 का मामला रहा। यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form-6 के किसी भी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। CJI ने कहा कि जब चुनाव आयोग रिकॉर्ड पेश करेगा, तब अदालत यह देखना चाहेगी कि Form-6 में बदलाव किसने किया। यह टिप्पणी उस दावे के संदर्भ में आई जिसमें चुनाव आयोग की ओर से पहले कहा गया था कि SIR के लिए Form-6 के साथ जोड़ा गया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट से मंजूर या मान्य किया गया था। इससे पहले 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े Form-6 के साथ लगाए गए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट के फैसले में समर्थन मिला था। हालांकि, सोमवार की सुनवाई में CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत ने Form-6 में किए गए किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी थी।
कोर्ट ने कहा- आयोग के फैसले सामूहिक प्रक्रिया से होने चाहिए
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि SIR से जुड़े कई फैसले चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति के बिना लिए गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग जैसे तीन सदस्यीय संवैधानिक निकाय में फैसले निर्धारित सामूहिक प्रक्रिया के तहत होने चाहिए और केवल एक सदस्य द्वारा लिया गया फैसला पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि SIR से जुड़े सभी विवादित फैसले CEC ज्ञानेश कुमार ने अकेले लिए थे। अदालत ने कहा कि इस बारे में रिकॉर्ड देखने की जरूरत है। यानी फिलहाल आरोपों को अदालत ने सिद्ध तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि कोई फैसला निर्धारित कानूनी या संस्थागत प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया था, तो उस फैसले पर रोक लगाने या उसे वापस लेने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। अभी अदालत ने ऐसा कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
दो PIL में CEC की भूमिका और SIR प्रक्रिया पर सवाल
SIR से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल हुई हैं। इनमें से एक याचिका राकेश कुमार सिंह ने दायर की है, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलीलें रखीं। दूसरी याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई है। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने पक्ष रखा। याचिकाओं में SIR से जुड़े फैसलों, Form-6 में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला उस रिपोर्ट के बाद ज्यादा चर्चा में आया, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 में किए गए बदलाव समेत SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से जुड़े अतिरिक्त सवाल और घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से यह जानकारी मांगी गई थी कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान मतदाता सूची में था या नहीं। इस बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर कानूनी और प्रक्रिया संबंधी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने उन राज्यों में, जहां SIR पूरा हो चुका है, Form-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा-पत्र हटाने का फैसला किया है और सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए 1960 के नियमों के तहत निर्धारित Form-6 का इस्तेमाल करने की बात कही है। अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में चुनाव आयोग से रिकॉर्ड और जवाब मांगा है। इसलिए फिलहाल अदालत की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई निलंबन आदेश नहीं दिया गया है और Form-6 में बदलाव को लेकर अंतिम जिम्मेदारी भी तय नहीं हुई है।
