ACR Promotion: कर्मचारियों की पदोन्नति और सेवा मामलों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक नजीर कायम करने वाला निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में दर्ज ऐसी कोई भी श्रेणी, जो उसके करियर की प्रगति और पदोन्नति पर विपरीत प्रभाव डालती हो, उससे कर्मचारी को अवगत कराना बेहद आवश्यक है। यदि कर्मचारी को अपना पक्ष रखने या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर नहीं दिया गया है, तो उस ACR को आधार बनाकर उसे प्रमोशन से बेदखल नहीं किया जा सकता।
1996 के प्रमोशन मामले में जस्टिस कुलदीप तिवारी की टिप्पणी
जस्टिस कुलदीप तिवारी की एकल पीठ ने पंजाब सरकार के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग से जुड़े चार अलग-अलग मामलों पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। (Punjab Technical Education Department) कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को सुने बिना उसकी पदोन्नति रोकना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने विभाग को आदेश दिया कि फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर संबंधित कर्मचारियों के रिकॉर्ड की समीक्षा कर उनकी पदोन्नति पर दोबारा विचार किया जाए।
28 कर्मचारियों के पैनल और ‘औसत’ श्रेणी का विवाद
यह पूरा मामला वर्ष 1996 का है, जब विभाग में फोरमैन इंस्ट्रक्टर के 26 रिक्त पदों पर पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने 28 पात्र कर्मचारियों का पैनल तैयार किया था। इस सूची में कपूरथला के जूनियर टेक्निकल स्कूल में कार्यरत तेजा सिंह का नाम 27वें स्थान पर दर्ज था।
योग्यता पूरी करने के बावजूद तेजा सिंह को प्रमोशन नहीं मिला और उनसे कनिष्ठ (Employee Promotion Case Punjab) कर्मचारियों को पदोन्नत कर दिया गया। विभाग ने तर्क दिया था कि पिछले पांच वर्षों की ACR में से तेजा सिंह की तीन रिपोर्ट ‘औसत’ और केवल दो ‘अच्छी’ थीं, जिससे वे निर्धारित मानक पूरे नहीं कर पाए।
सरकारी रुख में विरोधाभास और काल्पनिक पेंशन का पुनर्निर्धारण
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने दलील दी कि उस समय के नियमों के तहत केवल ‘प्रतिकूल’ (Adverse) टिप्पणियों को ही कर्मचारियों से साझा किया जाता था, जबकि ‘औसत’ श्रेणी को प्रतिकूल नहीं माना जाता था। हालांकि, बाद में विभाग ने खुद हलफनामा दाखिल कर औसत श्रेणी की रिपोर्ट बताने और पक्ष रखने का मौका देने पर सहमति जताई, जिसे अदालत ने विरोधाभासी माना।
चूंकि याचिकाकर्ता अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए हाईकोर्ट ने सीधे प्रमोशन देने के बजाय विभाग को निर्देश दिया है कि औसत श्रेणी वाली रिपोर्टों को नजरअंदाज करते हुए कर्मचारियों की पात्रता की समीक्षा की जाए। यदि वे योग्य पाए जाते हैं, तो उनके काल्पनिक वेतन और पेंशन पुनरीक्षण (Notional Fixation) का लाभ नियमानुसार तीन महीने के भीतर दिया जाए।
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