September 22, 2026

Ambala Vaman Dwadashi Mela: अंबाला में 125 साल पुराना वामन द्वादशी मेला शुरू, CM नायब सैनी ने टेका माथा

0
Ambala Vaman Dwadashi Mela: अंबाला में 125 साल पुराना वामन द्वादशी मेला शुरू, CM नायब सैनी ने टेका माथा

अंबाला में 125 साल पुराना वामन द्वादशी मेला शुरू, CM नायब सैनी ने टेका माथा

Ambala Vaman Dwadashi Mela: अंबाला शहर की सदियों पुरानी पहचान और धार्मिक आस्था के केंद्र ‘वामन द्वादशी मेले’ (Vaman Dwadashi Mela) का सोमवार को भव्य आगाज हो गया। 21 से 23 सितंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय पारंपरिक मेले को लेकर पूरे शहर में उत्साह का माहौल है। मेले के पहले ही दिन से ही न सिर्फ अंबाला (Ambala) बल्कि आसपास के जिलों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अंबाला में इस मेले के आयोजन की परंपरा 125 सालों से भी अधिक पुरानी है, जो शहर के सांस्कृतिक ताने-बाने और साझा विरासत को आज भी मजबूती से सहेजे हुए है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने टेका माथा, श्रद्धालुओं से की मुलाकात

मेले के पहले दिन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अंबाला पहुंचकर भगवान वामन के पावन स्वरूप के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर माथा टेका। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की खुशहाली और तरक्की की प्रार्थना की। मंदिर परिसर और मेला प्रांगण में पहुंचे मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया और उनसे बातचीत भी की। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे।

हिंडोलों से लेकर रोशनी का जगमगाता उत्सव: जानिए 3 दिनों की पूरी परंपरा

वामन द्वादशी मेले की अपनी एक विशिष्ट और तय परंपरा रही है। मेले के पहले दिन भगवान के स्वरूपों को विशेष रूप से तैयार हिंडोलों (पालकियों) में विराजमान किया जाता है। मेले के दूसरे दिन शहर भर में रंग-बिरंगी लाइटों से भव्य रोशनी की जाती है और युवाओं के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। पूरे मेला क्षेत्र में सजी दुकानों और खान-पान के स्टॉलों पर देर रात तक लोगों की भीड़ जुट रही है।

नवरंग राय तालाब में हिंडोलों के विसर्जन के साथ होगा समापन

उत्सव के तीसरे और अंतिम दिन यानी 23 सितंबर को शहर भर में एक विशाल एवं भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस शोभायात्रा में शहर के अलग-अलग मंदिरों से आए हिंडोले शामिल होंगे, जिनके दर्शन के लिए सड़कों के दोनों ओर श्रद्धालुओं का तांता लगता है। शाम के समय इन हिंडोलों को पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ ऐतिहासिक नवरंग राय तालाब में विसर्जित किया जाएगा। इसी विसर्जन के साथ अंबाला के इस सबसे बड़े जन-उत्सव का समापन होगा।

यह भी पढ़ें– हरियाणा में मानसून की विदाई से बदला मौसम, दिन में धूप का सितम और रातों में ठंडक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed