September 22, 2026

Haryana Weather: हरियाणा में मानसून की विदाई से बदला मौसम, दिन में धूप का सितम और रातों में ठंडक

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Haryana Weather: हरियाणा में मानसून की विदाई से बदला मौसम, दिन में धूप का सितम और रातों में ठंडक

हरियाणा में मानसून की विदाई से बदला मौसम

Haryana Weather: हरियाणा के आसमान से मानसूनी बादलों की रवानगी के साथ ही मौसम ने अपना रंग बदलना शुरू कर दिया है। प्रदेश में सुबह और देर रात के समय हल्की ठंडक की आहट मिलने लगी है, लेकिन दोपहर ढलते-ढलते तीखी धूप लोगों को बेहाल कर रही है। राज्य के 9 प्रमुख शहरों में दिन का पारा 35 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। फरीदाबाद 36.5 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया, जबकि हिसार के बालसमंद में रात का न्यूनतम तापमान घटकर 22.1 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है।

राजस्थान में एंटीसाइक्लोन बनने से बदलेगी हवा की दिशा, मानसून टर्फ दक्षिण की ओर खिसका

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के मुताबिक, राज्य से मानसूनी हवाओं की वापसी का दौर शुरू हो चुका है। पड़ोसी राज्य राजस्थान के ऊपर एक एंटीसाइक्लोन सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इस सिस्टम के बनने से हवाओं का रुख पूर्वी (पुरवाई) से बदलकर पश्चिमी हो जाएगा। साथ ही, मानसून की टर्फ रेखा भी खिसककर मध्य भारत की ओर चली जाएगी। हवाओं के इस बदलाव से हरियाणा में बारिश का बचा-खुचा दौर भी समाप्त हो जाएगा और मानसूनी गतिविधियों पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।

सात साल बाद मानसून की ऐसी निराशा, 26 वर्षों में 19 बार सूखे जैसे हालात

इस साल हरियाणा में मानसूनी फुहारों ने किसानों और आम जनता को काफी निराश किया है। 1 जून से 21 सितंबर तक के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में महज 317.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य बारिश के आंकड़े से सीधे 23 फीसदी कम है। इससे पहले साल 2019 में सामान्य से 42 फीसदी कम बारिश देखने को मिली थी। इस तरह करीब सात साल बाद प्रदेश को इतने बड़े मानसूनी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि साल 2001 से 2026 तक के 26 वर्षों में से 19 बार हरियाणा को सामान्य से कम बारिश से ही संतोष करना पड़ा है।

जींद और सिरसा में जमकर पड़ी सूखे की मार, पलवल में बरसे झमाझम मेघ

राज्य के अलग-अलग जिलों में बारिश का वितरण काफी असंतुलित रहा। बारिश की सबसे ज्यादा किल्लत जींद जिले में देखने को मिली, जहां सामान्य के मुकाबले 58 फीसदी कम मेघ बरसे। इसके अलावा सिरसा में 53 फीसदी, कैथल और अंबाला में 49-49 फीसदी तथा रोहतक में 47 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। इन जिलों के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए नहरी पानी और ट्यूबवेलों पर निर्भर रहना पड़ा। हालांकि, दक्षिणी हरियाणा का पलवल जिला इस मामले में खुशकिस्मत रहा, जहां सामान्य से 22 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई।

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