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Family Mealtime Child Development: मोबाइल स्क्रीन से दूर बच्चों के साथ बिताएं डिनर टाइम, जीवन भर काम आएंगी ये छोटी-छोटी बातें

Family Mealtime Child Development

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AAmandeep Singh

Family Mealtime Child Development:  भागदौड़ भरी जिंदगी में आज के दौर में परिवार के साथ बैठकर सुकून से दो पल बिताना भी एक चुनौती बनता जा रहा है। खासकर छोटे बच्चों वाले घरों में यह नज़ारा आम है कि माता-पिता पहले बच्चों को खाना खिलाकर सुला देते हैं या फुर्सत में रखते हैं, और बाद में खुद सुकून से भोजन करते हैं। बच्चों को संभालते हुए उन्हें साथ खिलाना भले ही किसी कठिन टास्क जैसा लगे, लेकिन बाल विकास और पैरेंटिंग के जानकारों की मानें तो परिवार के साथ डाइनिंग टेबल पर बच्चों को शामिल करने के ढेरों अनमोल फायदे हैं।

खाने को लेकर कम होते हैं नखरे और बढ़ता है सेंसरी डेवलपमेंट

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अक्सर देखने में आता है कि बच्चे खाने में बहुत आनाकानी करते हैं और हरी सब्जियां या फल देखकर मुंह बनाने लगते हैं। लेकिन जो प्री-स्कूलर बच्चे परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ बैठकर खाना खाते हैं, उनमें खाने को लेकर नखरे करने की प्रवृत्ति काफी हद तक कम हो जाती है। जब वे बड़ों को हरी सब्जियां और पौष्टिक चीजें खाते देखते हैं, तो उनका रुझान भी उसी तरफ बढ़ता है। इसके अलावा, अगर छोटे बच्चों को खुद से खाने को छूने, उसकी बनावट को महसूस करने और उसे एक्सप्लोर करने की आजादी दी जाए, तो उनके सेंसरी डेवलपमेंट यानी संवेदी विकास में भी जबरदस्त मदद मिलती है।

तय होता है सही रूटीन और स्क्रीन टाइम से मिलती है मुक्ति

आज की डिजिटल लाइफ में बच्चों को चुप कराने के लिए हाथ में मोबाइल थमा देना आम बात हो गई है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। इसके विपरीत, नियमित रूप से बच्चों को साथ बिठाकर खिलाने से उनकी भूख का सही अंदाजा होने लगता है और एक अनुशासित रूटीन बनता है। स्क्रीन के सामने सुसुप्त अवस्था में खाने के बजाय जब बच्चा परिवार के बीच टेबल पर बैठता है, तो उसका ध्यान भोजन पर रहता है। इससे उसकी अटेंशन पावर बढ़ती है और बच्चों में जरूरत से ज्यादा खाने यानी ओवरईटिंग का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।

सीखते हैं अनमोल सोशल स्किल्स और टेबल मैनर्स

घर के सभी सदस्यों का साथ मिलकर हल्के-फुलके और खुशनुमा माहौल में खाना खाना बच्चों के मानसिक विकास के लिए टॉनिक का काम करता है। इससे बच्चों के मन में खानपान को लेकर एक सकारात्मक सोच विकसित होती है। वे बिना किसी दबाव के अलग-अलग तरह के स्वाद और फ्लेवर से रूबरू होते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि यही वह उम्र और मौका होता है जब बच्चे अनजाने में ही सही, लेकिन बहुत कुछ सीख जाते हैं। सबके बीच कायदे से कैसे बैठना है, चम्मच का इस्तेमाल कैसे करना है और डाइनिंग टेबल पर दूसरों का लिहाज कैसे रखना है—ये तमाम बातें वे बड़ों को देखकर ही सीखते हैं।

मील टाइम को ऐसे बनाएं आसान और तनावमुक्त

  • बच्चों के साथ भोजन के समय को मजेदार बनाने के लिए कुछ छोटी बातों का ख्याल रखा जा सकता है:
  • यह जरूरी नहीं कि आप हर रोज डिनर में ही बच्चे को शामिल करें। शुरुआत आप लंच टाइम या फिर वीकेंड के ब्रेकफास्ट से कर सकती हैं।
  • बच्चे के बैठने के लिए एक सुरक्षित हाई-चेयर का इस्तेमाल करें ताकि वह सहज महसूस करे और गिरे नहीं।
  • अलग से कुछ खास बनाने के बजाय बच्चे की प्लेट में भी वही परोसें जो परिवार के लिए बना है, बस उसकी उम्र और चबाने की क्षमता के मुताबिक उसमें थोड़े बदलाव कर लें।
  • बच्चे पर अपनी पूरी प्लेट खत्म करने का दबाव बिल्कुल न डालें। इससे बच्चा तनाव में आ सकता है और खाने के प्रति उसके मन में नकारात्मकता घर कर सकती है।
  • खाना खाते वक्त कपड़े या टेबल गंदे होने पर चिल्लाने से बचें। बच्चे खाने के साथ जितने सहज होंगे, उनका शारीरिक और मानसिक विकास उतना ही प्राकृतिक और बेहतर होगा।
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