Kalesar Tree Cutting Controversy: प्रताप नगर रघबीर सिंह। यमुनानगर जिले के उपमंडल प्रताप नगर अंतर्गत आते कलेसर गांव से पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। गांव के एक किसान ने अपने खेत में खड़े सेक्शन-4 के करीब 50 साल पुराने पांच फलदार आम के पेड़ अवैध रूप से काटने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत प्रताप नगर थाना पुलिस के साथ-साथ वन विभाग और वन्य प्राणी विभाग को सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता अवनीश कुमार (निवासी कलेसर) ने पुलिस को दी अर्जी में बताया कि वह बीती 27 अक्टूबर को केदारनाथ धाम की धार्मिक यात्रा से वापस लौटे थे। इसके बाद जब वह अपने खेतों की तरफ गए, तो उनके होश उड़ गए। खेत में खड़े करीब पांच दशक पुराने और छायादार आम के पांच पेड़ कटे पड़े थे। जब उन्होंने आसपास के लोगों से इस बारे में पूछताछ की, तो ग्रामीणों ने बताया कि ये पेड़ गांव की महिला सरपंच और उनके प्रतिनिधि द्वारा कटवाए गए हैं। इसके तुरंत बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया।
वन विभाग और पुलिस ने मौके का किया मुआयना
सूचना मिलते ही वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय पुलिस की टीम ने घटना स्थल का दौरा किया और कटे हुए पेड़ों की स्थिति का जायजा लिया। अवनीश कुमार का कहना है कि ये पेड़ न केवल उनकी निजी संपत्ति थे, बल्कि सेक्शन-4 की श्रेणी में आते थे, जिन्हें बिना विभागीय अनुमति के काटना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गैर-मौजूदगी का फायदा उठाकर इस घटना को अंजाम दिया गया है।
सरपंच प्रतिनिधि ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर, इन आरोपों पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कलेसर के सरपंच प्रतिनिधि ज्ञान सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि गांव में पंचायत द्वारा पक्की गली का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। निर्माण के रास्ते में जो सार्वजनिक पेड़ आ रहे थे, केवल उन्हें ही नियमानुसार और वैधानिक प्रक्रिया के तहत कटवाया गया है।
जहां तक अवनीश कुमार के खेत के पेड़ों का सवाल है, ज्ञान सिंह ने दावा किया कि वे पेड़ काटे नहीं गए थे, बल्कि तेज हवाओं और जंगली जानवरों की वजह से खुद-ब-खुद गिर गए थे। उन्होंने बताया कि गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी को पंचायत ने अपनी कस्टडी में सुरक्षित रखवा लिया है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रहे हैं।
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