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Bhupinder Singh Hooda: शाहबाद पहुंचे भूपेंद्र हुड्डा, एमएसपी और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा

AAmandeep Singh
Bhupinder Singh Hooda: शाहबाद पहुंचे भूपेंद्र हुड्डा, एमएसपी और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा
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शाहबाद। हरियाणा की सियासत के केंद्र बिंदु और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक पारिवारिक समारोह के बहाने कुरुक्षेत्र के शाहबाद पहुंचे, लेकिन उनके इस दौरे ने प्रदेश की मौजूदा सरकार के खिलाफ एक तीखा सियासी मोर्चा खोल दिया। मौका था कांग्रेस विधायक रामकरण काला के पोते को आशीर्वाद देने के लिए आयोजित एक निजी कार्यक्रम का, जहां हुड्डा की मौजूदगी से उत्साहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार इस्तकबाल किया। हालांकि, पारिवारिक आयोजन के इतर जब हुड्डा मीडिया के कैमरों के सामने आए, तो उन्होंने सूबे की प्रशासनिक और आर्थिक नीतियों पर तीखे तीर छोड़े।

युवाओं के पास रोजगार नहीं, प्रदेश का हर नागरिक खुद को समझ रहा असुरक्षित: हुड्डा

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प्रेस से बातचीत के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने सबसे बड़ा हमला राज्य की रोजगार नीति पर बोला। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, “यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि जो हरियाणा कभी विकास के मामलों में अग्रणी था, वह आज बेरोजगारी के मोर्चे पर देश में शीर्ष पायदान पर पहुंच गया है।

” हुड्डा ने कहा कि युवाओं के पास भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट रास्ता नहीं है। इसके साथ ही प्रदेश की चरमराती कानून-व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा है, उससे आम जनता के भीतर असुरक्षा की भावना घर कर गई है और अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं।

“वो 24 फसलें कौन सी हैं?” एमएसपी और महंगाई के मोर्चे पर सरकार को घेरा

किसान राजनीति को करीब से जानने वाले हुड्डा ने कृषि संकट का जिक्र करते हुए कहा कि आज खेती की लागत आसमान छू रही है, जबकि उसके मुकाबले किसान की आमदनी लगातार सिकुड़ती जा रही है। उन्होंने सरकार के उस बहुप्रचारित दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जाता है कि हरियाणा में 24 फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जा रही हैं।

हुड्डा ने तंज कसते हुए कहा, “मैं विधानसभा से लेकर सार्वजनिक मंचों तक कई बार सरकार से यह आधिकारिक सूची मांग चुका हूं कि आखिर वो कौन-सी 24 फसलें हैं जो एमएसपी पर बिक रही हैं? लेकिन आज तक सरकार के पास इसका कोई सीधा और स्पष्ट जवाब नहीं है।” उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और बेलगाम महंगाई ने न सिर्फ अन्नदाता, बल्कि समाज के हर तबके को आर्थिक संकट में धकेल दिया है।

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