Child Nutrition Tips: जूस या पूरा फल? जानिए छोटे बच्चों की डाइट में क्या शामिल करना है सही
जूस या पूरा फल? जानिए छोटे बच्चों की डाइट में क्या शामिल करना है सही
Child Nutrition Tips: छोटा बच्चा जब ठोस आहार लेना शुरू करता है, तो ज्यादातर माता-पिता को लगता है कि फलों का जूस पिलाना सबसे आसान और पौष्टिक विकल्प है। हालांकि, बाल रोग विशेषज्ञों का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है। जाने-माने पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक के अनुसार, जूस को स्वास्थ्यवर्धक मानकर छोटे बच्चों को पिलाना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। अगर आप भी अपने बच्चे की डाइट में जूस शामिल करने की सोच रहे हैं, तो इसके फायदे और नुकसान समझ लेना बेहद जरूरी है।
1 साल से छोटे बच्चों को भूलकर भी न दें जूस, जानिए डॉक्टरी वजह
डॉ. रवि मलिक ने अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एक साल से कम उम्र के शिशुओं को किसी भी तरह का फल का जूस नहीं दिया जाना चाहिए। इस उम्र में बच्चे का पाचन तंत्र बहुत नाजुक होता है और उसके पोषण का मुख्य जरिया सिर्फ मां का दूध या फॉर्मूला मिल्क ही होना चाहिए। जूस में फल का ठोस हिस्सा शामिल नहीं होता, जिससे प्राकृतिक फाइबर पूरी तरह खत्म हो जाता है। इसके अलावा, जूस का अत्यधिक मीठा स्वाद बच्चे में शुरुआती उम्र से ही मीठा खाने की आदत डाल देता है, जो आगे चलकर अन्य पौष्टिक चीजों के प्रति उसकी अरुचि का कारण बन सकता है।
1 से 6 साल के बच्चों के लिए क्या है सही नियम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, एक साल की उम्र के बाद भी जूस को बच्चे की दैनिक खुराक का मुख्य हिस्सा बनाने की जरूरत नहीं है। यदि आप जूस देना ही चाहते हैं, तो 1 से 6 साल तक के बच्चों के लिए इसकी मात्रा रोजाना 120 मिलीलीटर (लगभग आधा कप) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। बाजार में मिलने वाले डिब्बा बंद (पैकेज्ड या टेट्रा पैक) जूस में एडेड शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जो बच्चों के दांतों और पेट के लिए हानिकारक हैं। अगर देना भी हो, तो घर में बना ताजा जूस ही सीमित मात्रा में दें।
‘जूस नहीं, पूरा फल खिलाएं’: जानिए क्यों बेहतर है साबुत फल?
डॉक्टरों का साफ मानना है कि जूस कभी भी साबुत फल का विकल्प नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, बच्चे को संतरे का रस पिलाने के बजाय संतरे की फांकें खिलाना ज्यादा फायदेमंद है। जब बच्चा पूरा फल चबाकर खाता है, तो उसे प्रचुर मात्रा में फाइबर मिलता है, जिससे पाचन तंत्र तंदुरुस्त रहता है। साथ ही, अलग-अलग बनावट और स्वाद के खाद्य पदार्थ चबाने से बच्चे की जबड़े की मांसपेशियों का विकास होता है।
बच्चों की थाली में केवल फल या जूस के बजाय सब्जियां, दालें, खिचड़ी और अन्य पौष्टिक चीजें शामिल होनी चाहिए। हाइड्रेशन और पोषण के लिए दूध, स्मूदी या नारियल पानी जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं। किसी भी नई चीज को बच्चे की डाइट में शामिल करने से पहले उसके स्वास्थ्य और उम्र के हिसाब से अपने बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) से परामर्श जरूर लें।
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